रांची से सटे इलाकों में खुलेआम बालू का अवैध खनन, कार्रवाई करने वाले दारोगा पर ही गिरी गाज
रांची- बुंडू, सिल्ली और बुड़मू इलाकों में प्रतिदिन बड़े पैमाने पर बालू का अवैध खनन और परिवहन किए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक इन क्षेत्रों से रोज़ाना लगभग 250 से 300 ट्रक अवैध बालू का परिवहन हो रहा है, जबकि प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अवैध बालू जब्ती के दौरान हुई हाथापाई
सूत्रों के अनुसार बीते सप्ताह रांची ज़िले के एक थाना प्रभारी ने कुछ अवैध बालू लदे ट्रकों को जब्त किया था। इस कार्रवाई के दौरान बालू माफियाओं ने पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई तक की। स्थिति तनावपूर्ण हो गई और मामला थाने तक पहुंचा।
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दलाल की एंट्री और ‘ऊपर’ का दबाव
बताया जाता है कि सन्नी नामक एक दलाल ट्रकों को छुड़ाने के लिए थाने पहुंचा, जहां उसकी संबंधित दारोगा से तीखी बहस हुई। इसके बाद कथित तौर पर ‘ऊपर’ के दबाव में न सिर्फ सभी जब्त ट्रकों को छोड़ दिया गया, बल्कि किसी भी प्रकार की प्राथमिकी या कानूनी कार्रवाई भी नहीं होने दी गई।
कार्रवाई करने वाले दारोगा का निलंबन
हैरान करने वाली बात यह है कि अवैध बालू परिवहन पर कार्रवाई करने वाले दारोगा को ही बाद में अन्य कारणों का हवाला देते हुए निलंबित कर थाने से हटा दिया गया। इस कदम ने प्रशासनिक निष्पक्षता और अवैध खनन के खिलाफ सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बाबूलाल मरांडी का सरकार पर हमला
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे मामले को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि अवैध बालू की चोरी इसी रफ्तार से चलती रही और ‘गलती’ से अवैध खनन पकड़ने वाले अधिकारियों को ही सजा दी जाती रही, तो कुछ दलाल-माफिया भले ही अकूत संपत्ति बना लें, लेकिन राज्य की नदियां और जल-जंगल-जमीन पूरी तरह तबाह हो जाएंगी।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध बालू खनन पर लगाम नहीं लगाई गई, तो इसका गंभीर पर्यावरणीय और सामाजिक दुष्परिणाम भुगतना पड़ेगा।
