रघुवर दास ने उठाए राज्य के गंभीर मुद्दे, बोले- PESA कानून अब और टालना ठीक नहीं.

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रघुवर दास ने की राज्यपाल से मुलाकात, PESA कानून, पीएम-जनमन योजना और JPSC परीक्षा की जांच पर की चर्चा

मुख्य बिंदु:

  • रघुवर दास ने राजभवन में राज्यपाल संतोष गंगवार से की शिष्टाचार भेंट

  • PESA कानून लागू कराने की जरूरत पर दिया जोर

  • पीएम-जनमन योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की मांग

  • JPSC 2023 परीक्षा में अनियमितताओं की जांच की उठाई मांग



राजभवन में हुई मुलाकात, उठाए अहम मुद्दे

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता रघुवर दास ने  राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से राजभवन में मुलाकात की। इस भेंट के दौरान उन्होंने राज्य के कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। मुलाकात की जानकारी खुद रघुवर दास ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी।

PESA कानून लागू करने पर बल

पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के समक्ष पेसा (PESA) कानून को झारखंड में प्रभावी ढंग से लागू कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि यह कानून आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को अधिक अधिकार और भागीदारी प्रदान करता है, लेकिन राज्य सरकार की उदासीनता के कारण इसे अभी तक ठीक से लागू नहीं किया गया है।

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PM-Janman योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत

इसके अलावा रघुवर दास ने आदिवासी समुदाय के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महा अभियान (PM-Janman) पर भी चर्चा की। उन्होंने आग्रह किया कि इस योजना का राज्य में सही ढंग से क्रियान्वयन हो ताकि लाभ वास्तव में अंतिम पंक्ति तक पहुंच सके।

JPSC परीक्षा 2023 की जांच की मांग

भाजपा नेता ने JPSC द्वारा आयोजित संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2023 में सामने आई अनियमितताओं की ओर भी राज्यपाल का ध्यान आकृष्ट कराया। उन्होंने कहा कि परीक्षार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता, अतः इस मामले की गहन जांच की जानी चाहिए।

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पूर्व मुख्यमंत्री की सक्रियता पर सियासी हलचल

रघुवर दास की यह सक्रियता झारखंड की राजनीति में नई हलचल ला सकती है। खासतौर पर जब राज्य में JPSC, PESA कानून और आदिवासी योजनाओं को लेकर लगातार बहस जारी है, तो उनकी यह पहल कई सियासी संकेत दे रही है।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास द्वारा राज्यपाल से की गई यह मुलाकात केवल शिष्टाचार नहीं बल्कि राज्य के संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दों पर केंद्रित एक सार्थक वार्ता थी। अब देखना होगा कि राज्यपाल इस पर क्या कदम उठाते हैं और क्या सरकार इन विषयों पर कोई कार्रवाई करती है या नहीं।

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