झारखंड सरकार की पहल से कुवैत में दिवंगत प्रवासी श्रमिक का पार्थिव शरीर पहुंचा भारत, परिवार को मिली राहत
मुख्य बिंदु:
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कुवैत में कार्यरत हजारीबाग निवासी रामेश्वर महतो का हुआ आकस्मिक निधन
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राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष रांची की तत्परता से पार्थिव शरीर भारत लाया गया
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परिजनों की सहमति और दूतावास की पहल से 31 जुलाई को रांची पहुंचा शव
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उपायुक्त और प्रखंड विकास पदाधिकारी ने निभाई समन्वय की अहम भूमिका
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एम्बुलेंस से पार्थिव शरीर को पहुंचाया गया गृह जिला हजारीबाग
दूर परदेश से स्वदेश वापसी: झारखंड सरकार की संवेदनशील पहल
रांची, 31 जुलाई 2025- कुवैत में कार्यरत झारखंड के एक प्रवासी श्रमिक रामेश्वर महतो के पार्थिव शरीर को आखिरकार उनके परिजनों तक पहुंचाने में झारखंड सरकार सफल रही है। यह कार्य राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष, रांची की तत्पर पहल और संबंधित विभागों के समन्वय के कारण संभव हो सका।
12 वर्षों से कुवैत में कार्यरत थे श्री महतो
हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित बंडखरो गांव निवासी श्री रामेश्वर महतो पिछले 12 वर्षों से M/s IMCO Engineering & Construction Company, कुवैत में कार्यरत थे। 15 जून 2025 को उनका हृदय व श्वसन गति रुकने से निधन हो गया था।
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पत्नी के आग्रह पर राज्य सरकार हरकत में आई
रामेश्वर महतो की पत्नी प्रमिला देवी ने 19 जून 2025 को राज्य प्रवासी नियंत्रण कक्ष, रांची को अपने पति का पार्थिव शरीर झारखंड लाने के लिए आवेदन दिया था। इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए भारतीय दूतावास, कुवैत और Protector of Emigrants, रांची को सूचित किया गया।
पारिवारिक सहमति और भुगतान में देरी बनी चुनौती
शुरुआती चरण में परिजनों ने अंतिम वेतन भुगतान से पहले शव स्वीकारने से इनकार कर दिया, जिससे प्रक्रिया में थोड़ी देरी हुई। बाद में लगातार संवाद और प्रयासों के बाद 27 जुलाई को उपायुक्त, हजारीबाग ने परिजनों से सहमति प्राप्त कर ली और भारतीय दूतावास को औपचारिक सूचना भेजी गई।
31 जुलाई को शव भारत लाया गया, प्रशासन ने निभाई जिम्मेदारी
28 जुलाई को कंपनी द्वारा प्रक्रिया आरंभ की गई और 31 जुलाई 2025 को शव को बिरसा मुंडा एयरपोर्ट, रांची लाया गया। दोपहर 3:45 बजे पार्थिव शरीर को मृतक के पुत्र किशोर महतो और प्रखंड विकास पदाधिकारी अखिलेश कुमार ने प्राप्त किया।
जिला प्रशासन द्वारा पार्थिव शरीर को हजारीबाग स्थित उनके पैतृक गांव तक ले जाने के लिए एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई।
सरकार की मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण
यह पूरा प्रकरण बताता है कि प्रवासी श्रमिकों के प्रति झारखंड सरकार संवेदनशील और उत्तरदायी है। प्रवासियों की सुरक्षा और संकट की घड़ी में सहयोग सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
