JNU छात्रसंघ चुनाव 2025 में वामपंथी संगठनों की बड़ी जीत। रांची में जश्न।

झारखंड/बिहार राष्ट्रीय ख़बर

जेएनयू छात्रसंघ चुनाव में आइसा-डीएसएफ गठबंधन की बड़ी जीत, रांची में भी जश्न का माहौल

रांची, 28 अप्रैल 2025।
देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के छात्रसंघ चुनाव में वामपंथी छात्र संगठनों आइसा (AISA) और डीएसएफ (DSF) के गठबंधन ने शानदार जीत दर्ज की है। अध्यक्ष पद पर नीतीश कुमार, उपाध्यक्ष पद पर मनीषा और महासचिव पद पर मुन्तहा फातिमा विजयी हुए हैं। इस ऐतिहासिक जीत ने वामपंथी छात्र संगठनों को एक नई ऊर्जा दी है।

JNU छात्रसंघ चुनाव 2025आइसा की जीत
JNU छात्रसंघ चुनाव में आइसा-डीएसएफ गठबंधन की बड़ी जीत

रांची में डीएसपीएमयू और रांची विश्वविद्यालय में मना जश्न

जेएनयू में मिली इस जीत का असर रांची में भी दिखाई दिया। डीएसपीएमयू (डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय) और रांची विश्वविद्यालय परिसर में छात्रों ने जोरदार जश्न मनाया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) और आदिवासी छात्र संघ (एसीएस) के कार्यकर्ताओं ने मिलकर रंग-गुलाल उड़ाते हुए विजय जुलूस निकाला। इस दौरान परिसर में उत्साह और खुशी का माहौल छाया रहा।

आइसा आदिवासी छात्र संघJNU में वामपंथी संगठन
छात्र संगठनों ने मनाया जेएनयू चुनाव में जीत का जश्न

छात्र नेताओं ने जीत को छात्र संघर्ष की जीत बताया

जुलूस में शामिल आइसा झारखंड राज्य सह सचिव संजना मेहता और नौरीन अख्तर ने कहा,

“यह जीत केवल आइसा की नहीं, बल्कि उन तमाम छात्र हितों के लिए संघर्ष कर रहे कार्यकर्ताओं की जीत है जो विश्वविद्यालयों को कॉरपोरेट घरानों का खजाना बनाने, फीस वृद्धि, नई शिक्षा नीति 2020 और फासीवादी नीतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं।”

छात्र नेताओं ने कहा कि यह परिणाम दिखाता है कि छात्र समुदाय अब भी सामाजिक न्याय, समानता और लोकतंत्र के मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है।



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आदिवासी छात्र संघ ने कहा- बहुजन हितों की जीत

आदिवासी छात्र संघ के प्रभारी दयाराम और सुनील सोरेन ने इस जीत को बहुजन समाज के छात्रों की जीत बताया। उन्होंने कहा,

“यह जीत भाजपा, आरएसएस और एबीवीपी जैसी ताकतों की करारी हार है। दलित, आदिवासी, पिछड़े और अल्पसंख्यक छात्रों के खिलाफ की जा रही साजिशें इस जीत के जरिए नाकाम हुई हैं।”

उन्होंने चेतावनी दी कि विश्वविद्यालय परिसरों में किसी भी प्रकार का भेदभाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और छात्र अधिकारों के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

फासीवाद और ब्राह्मणवाद के खिलाफ मजबूत संदेश

आइसा और एसीएस के नेताओं मो. समी और बादल भोक्ता ने कहा कि जेएनयू चुनाव परिणाम ने देश में फासीवाद, ब्राह्मणवाद और शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ एक मजबूत संदेश दिया है।
उनके अनुसार,

“देश में सस्ती और समावेशी शिक्षा के अधिकार पर हमला करने वाली नीतियों को छात्र समुदाय ने खारिज कर दिया है। साथ ही शैक्षणिक संस्थानों पर संघी सोच थोपने के प्रयास भी नाकाम हो गए हैं।”

प्रगतिशील ताकतों का एकजुट प्रदर्शन

विजय जुलूस के दौरान छात्रों ने नारे लगाए और शैक्षणिक आजादी के समर्थन में भाषण दिए। उपस्थित छात्रों ने इसे सभी प्रगतिशील विचारधाराओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को मानने वालों की सामूहिक जीत बताया।

इस अवसर पर आइसा से छुटुराम महतो, मो. समी, विजय कुमार, अनुराग रॉय, निखिल कुमार और आदिवासी छात्र संघ से सुनील सोरेन, अमृत मुंडा, बादल भोक्ता, वसीम अंसारी, सुभाष मुंडा, रंजन महतो, श्यामसुंदर वर्मा समेत बड़ी संख्या में छात्र शामिल थे। सभी ने इस जीत को देशभर के छात्रों के लिए प्रेरणास्रोत बताया और भविष्य में भी छात्र अधिकारों की लड़ाई को तेज करने का संकल्प लिया।

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