Paras HEC Hospital Ranchi PCL Reconstruction Surgery

पारस एचईसी हॉस्पिटल ने घुटना प्रत्यारोपण टाला, PCL सर्जरी से मिली नई जिंदगी.

झारखंड/बिहार राष्ट्रीय ख़बर

मुख्य बिंदु-

  • 56 वर्षीय महिला का PCL रिकंस्ट्रक्शन कर घुटना प्रत्यारोपण टाला गया

  • पारस एचईसी हॉस्पिटल में ऑर्थो टीम ने किया सफल ऑपरेशन

  • महीनों से दर्द, सूजन और अस्थिरता से परेशान थी महिला

  • कई डॉक्टरों ने कहा था—उम्र और ऑस्टियोआर्थराइटिस की समस्या

  • सही निदान ने सर्जरी के बाद दी नई गतिशीलता

  • डॉक्टरों ने समय पर विशेषज्ञ परामर्श लेने की अपील की


पारस एचईसी हॉस्पिटल ने किया सफल PCL रिकंस्ट्रक्शन

रांची: पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में 56 वर्षीय महिला मरीज की आर्थ्रोस्कोपिक पोस्टीरियर क्रूसिएट लिगामेंट (PCL) रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी सफलतापूर्वक की गई, जिससे उनका घुटना प्रत्यारोपण टल गया। यह उपलब्धि अस्पताल की ऑर्थोपेडिक टीम के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है।

मरीज को कई महीनों से दर्द और अस्थिरता की समस्या

जानकारी के अनुसार, महिला लंबे समय से घुटने के तेज दर्द, सूजन और अस्थिरता से जूझ रही थीं। राज्यभर के कई चिकित्सकों से परामर्श के दौरान बार-बार उन्हें बताया गया कि उनकी समस्या उम्र और ऑस्टियोआर्थराइटिस से जुड़ी है, तथा इलाज के रूप में घुटना प्रत्यारोपण ही विकल्प है। लगातार निराश होकर महिला महानगर में उपचार कराने का विचार कर चुकी थीं।

डॉ. निर्मल कुमार ने दिया बेहतर विकल्प, सर्जरी बन गई जीवन बदलने वाली

अस्पताल पहुँचने पर ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. निर्मल कुमार ने मरीज के मामले का अध्ययन करने के बाद आर्थ्रोस्कोपिक PCL रिकंस्ट्रक्शन की सलाह दी। सर्जरी बेहद सफल रही और ऑपरेशन के बाद मरीज के दर्द में स्पष्ट कमी तथा घुटने में स्थिरता देखी गई।

डॉ. निर्मल ने कहा—
“जब मरीज मेरे पास आई, वह भावनात्मक रूप से बेहद टूट चुकी थीं। कई दवाएं और फिजियोथेरेपी से भी उन्हें राहत नहीं मिली थी। महत्वपूर्ण बात यह है कि हर घुटने का दर्द ऑस्टियोआर्थराइटिस नहीं होता। सही निदान कई अनावश्यक समस्याओं से बचा सकता है।”

डॉक्टरों की सलाह—दर्द 1–2 सप्ताह में कम न हो तो विशेषज्ञ से मिलें

डॉ. निर्मल कुमार ने आम जनता को संदेश दिया कि चोट के बाद यदि 1–2 हफ्ते में दर्द और सूजन कम न हो, तो तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। देर होने पर स्थिति गंभीर हो सकती है।

मरीज ने कहा—“अब मैं सामान्य जीवन जी पा रही हूँ”

महिला ने बताया कि वह कई महीनों से दर्द और भ्रम की स्थिति में थीं और उन्हें लगता था कि अब इलाज संभव नहीं। लेकिन पारस एचईसी हॉस्पिटल में उन्हें सही इलाज और नई उम्मीद मिली।

अस्पताल प्रशासन ने बताया—ऑर्थो ट्रीटमेंट के लिए पूरी सुविधा उपलब्ध

पारस हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि अस्पताल में आर्थोपेडिक से जुड़ी सभी बीमारियों का अत्याधुनिक उपचार उपलब्ध है। उन्होंने कहा—
“यह मामला चुनौतीपूर्ण था, लेकिन हमारी विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक सर्जरी कर मरीज को नई जिंदगी दी।”

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