3 महीने से वेतन नहीं, अब AJSU एंट्री के बाद Management झुका

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Orient Craft Workers Protest: AJSU Support के बाद BIG BREAKTHROUGH, बकाया वेतन पर बनी सहमति

मुख्य बिंदु 
ओरिएंट क्राफ्ट कर्मियों के आंदोलन को AJSU का समर्थन
प्रबंधन के साथ वार्ता में बकाया वेतन भुगतान का आश्वासन
न्यूनतम मजदूरी लागू करने पर बनी सहमति
3 महीने से वेतन नहीं मिलने का कर्मियों का आरोप
खेलगांव में बढ़ा विवाद, आंदोलन को मिला राजनीतिक समर्थन

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रांची के खेलगांव स्थित ओरिएंट क्राफ्ट कंपनी में काम कर रहे कर्मियों का आंदोलन अब बड़ा रूप लेता नजर आ रहा है। दरअसल, जब इस आंदोलन को आजसू पार्टी का समर्थन मिला, तब मामला और तेज हो गया। इसी कड़ी में कंपनी प्रबंधन और कर्मियों के बीच अहम वार्ता आयोजित की गई।
इस बैठक में आजसू जिलाध्यक्ष सह जिप सदस्य संजय महतो, वीणा महतो, बबलू महतो, रोशन मुंडा समेत कई नेता मौजूद रहे। इसके अलावा श्रम विभाग के अधिकारी भी वार्ता में शामिल हुए, जिससे इस मुद्दे की गंभीरता साफ झलकती है।

वार्ता में क्या हुआ फैसला?
वार्ता के दौरान कंपनी प्रबंधन ने कर्मियों को बड़ा आश्वासन दिया। प्रबंधन की ओर से कहा गया कि कर्मियों का बकाया वेतन एक दिन के भीतर भुगतान कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही, एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। सरकार द्वारा लेबर कोर्ट के माध्यम से तय न्यूनतम मजदूरी लागू करने पर भी सहमति बनी। यह फैसला कर्मियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है।

कर्मियों का आरोप: 3 महीने से नहीं मिला वेतन
हालांकि, इस पूरे विवाद की जड़ कर्मियों की नाराजगी है। कर्मियों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से उन्हें वेतन नहीं मिला है। इतना ही नहीं, उनसे न्यूनतम मजदूरी से भी कम पर काम कराया जा रहा था।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी लगभग ₹783 प्रतिदिन है। इसके बावजूद कर्मियों को इससे कम भुगतान किए जाने का आरोप गंभीर सवाल खड़े करता है।

एकजुट होकर किया विरोध, बढ़ा दबाव
कर्मियों ने अपनी मांगों को लेकर एकजुट होकर कंपनी प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन किया। लगातार बढ़ते दबाव और राजनीतिक समर्थन के बाद आखिरकार प्रबंधन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा।
यानी साफ है कि संगठित आंदोलन और राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद ही इस मुद्दे पर प्रगति संभव हो सकी।
अब आगे क्या?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कंपनी प्रबंधन अपने वादे पर खरा उतरेगा? अगर तय समय में वेतन भुगतान नहीं होता, तो आंदोलन और तेज हो सकता है।
फिलहाल, इस समझौते के बाद कर्मियों को राहत की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन असली परीक्षा अब प्रबंधन के वादों के क्रियान्वयन की होगी।

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