महिला आरक्षण पर BJP का आक्रोश मार्च, लेकिन सीता सोरेन की गैर मौजूदगी बनी बड़ी चर्चा
Top Points
- रांची में महिला आरक्षण मुद्दे पर BJP का बड़ा आक्रोश मार्च
- बाबूलाल मरांडी, अन्नपूर्णा देवी समेत कई बड़े नेता मौजूद
- महिला नेताओं की मजबूत भागीदारी, लेकिन सीता सोरेन नहीं दिखीं
- गैरमौजूदगी ने बढ़ाए राजनीतिक सवाल
- BJP में नाराज़गी या JMM में वापसी की अटकलें तेज
रांची में BJP का शक्ति प्रदर्शन, महिला मुद्दे पर सड़क पर उतरी पार्टी
झारखंड की राजधानी रांची में महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ा आक्रोश मार्च आयोजित किया। इस प्रदर्शन में पार्टी ने अपनी ताकत दिखाते हुए केंद्र और राज्य स्तर के कई बड़े नेताओं को एक मंच पर उतारा।
कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी और सांसद संजय सेठ समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इसके अलावा बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं और नेताओं की भागीदारी भी देखने को मिली।
“गांव से चलेगी सरकार” — हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, पंचायतों को करोड़ों की सौगात
महिला कार्यक्रम में महिला नेता की गैरमौजूदगी ने खड़े किए सवाल
हालांकि, इस पूरे आयोजन में सबसे ज्यादा चर्चा जिस बात की रही, वह थी भाजपा नेता सीता सोरेन की गैरमौजूदगी।
जब कार्यक्रम पूरी तरह महिलाओं के मुद्दे पर केंद्रित था और कई प्रमुख महिला चेहरे मंच पर मौजूद थे, तब सीता सोरेन का कहीं नजर न आना राजनीतिक हलकों में सवाल खड़े कर रहा है।
यह सवाल इसलिए भी अहम हो जाता है क्योंकि सीता सोरेन हाल ही में झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) छोड़कर BJP में शामिल हुई थीं और उन्हें पार्टी का बड़ा आदिवासी महिला चेहरा माना जा रहा था।
चुनाव के बाद बदला रुख? लगातार दूरी के संकेत
पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद से ही सीता सोरेन की सक्रियता में कमी देखने को मिल रही है। वह कई महत्वपूर्ण पार्टी कार्यक्रमों से दूरी बनाए हुए नजर आई हैं।
हाल ही में एक बातचीत में उन्होंने यह संकेत भी दिया था कि पार्टी में उन्हें अपेक्षित महत्व नहीं मिल रहा है। ऐसे में उनकी गैरमौजूदगी को सिर्फ संयोग मानना मुश्किल हो रहा है।
क्या BJP में सब कुछ ठीक नहीं?
सीता सोरेन की अनुपस्थिति ने BJP के अंदरूनी समीकरणों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि—
- यह पार्टी के भीतर असंतोष का संकेत हो सकता है
- या फिर कोई रणनीतिक दूरी बनाई जा रही है
- या फिर भविष्य के किसी बड़े राजनीतिक फैसले की तैयारी चल रही है
घर वापसी की अटकलें तेज, JMM कनेक्शन फिर चर्चा में
सीता सोरेन को लेकर सबसे बड़ी चर्चा उनकी संभावित “घर वापसी” को लेकर है।
बता दें कि वह सोरेन परिवार की पुत्रवधू हैं और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की भाभी हैं। ऐसे में उनका JMM से पुराना और मजबूत जुड़ाव रहा है।
हाल के दिनों में यह खबर भी सामने आई थी कि वह BJP छोड़कर फिर से JMM में शामिल हो सकती हैं। हालांकि, इस पर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
राजनीतिक असर: BJP और JMM दोनों पर नजर
यदि सीता सोरेन BJP में सक्रिय नहीं रहती हैं, तो यह पार्टी के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है, खासकर आदिवासी और महिला वोट बैंक के लिहाज से।
वहीं, अगर उनकी JMM में वापसी होती है, तो यह झारखंड की राजनीति में बड़ा समीकरण बदल सकता है।
निष्कर्ष: गैरमौजूदगी या बड़ा सियासी संकेत?
रांची के इस बड़े राजनीतिक आयोजन में सीता सोरेन की अनुपस्थिति सिर्फ एक सामान्य घटना नहीं मानी जा रही।
यह या तो पार्टी के अंदरूनी असंतोष का संकेत है, या फिर झारखंड की राजनीति में आने वाले किसी बड़े बदलाव की आहट।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में सीता सोरेन क्या कदम उठाती हैं और BJP इस स्थिति को कैसे संभालती है।
