MMDR बिल के खिलाफ झारखंड में बड़ा आंदोलन, JMM और वामदल सड़क पर

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MMDR विधेयक पर झामुमो और वामदलों का विरोध तेज, आंदोलन की रणनीति होगी तय

केंद्र के खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (MMDR) के खिलाफ झारखंड में सियासी विरोध तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जहां इस मुद्दे पर आज राज्यव्यापी आंदोलन की रणनीति और तारीख का ऐलान करने की तैयारी की है, वहीं छह वामदलों ने 25 से 31 अगस्त तक पूरे राज्य में आंदोलन चलाने की घोषणा कर दी है।

प्रमुख बातें
MMDR विधेयक के खिलाफ झामुमो ने राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी की
20 अगस्त को रांची में झामुमो की अहम बैठक
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही विधेयक का विरोध कर चुके हैं
झामुमो का दावा—विधेयक से राज्यों के अधिकार और राजस्व प्रभावित होंगे
छह वामदलों ने 25 से 31 अगस्त तक विधेयक की प्रतियां जलाने का फैसला किया
रांची में प्रदर्शन कर राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा
आगे केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों के घेराव और झारखंड बंद की भी तैयारी

झामुमो आज तय करेगा आंदोलन की रणनीति और तारीख
केंद्र के खान एवं खनिज संशोधन विधेयक (MMDR) का झारखंड में झामुमो ने कड़ा विरोध किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले ही इस विधेयक के खिलाफ अपनी आपत्ति दर्ज करा चुके हैं। अब झामुमो इस मुद्दे को लेकर राज्यव्यापी आंदोलन की तैयारी में जुट गया है।

पार्टी की 20 अगस्त को रांची के सोहराय भवन में बैठक होगी। इस बैठक में आंदोलन की रूपरेखा तैयार करने के साथ-साथ आंदोलन की तारीख का भी ऐलान किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। इसमें पार्टी के केंद्रीय पदाधिकारियों के साथ जिलों के प्रमुख पदाधिकारी भी शामिल होंगे।

झामुमो के महासचिव विनोद पांडेय पहले ही कह चुके हैं कि केंद्र सरकार अगर 80 के दशक वाले आंदोलन के लिए बाध्य करेगी तो पार्टी आर्थिक नाकेबंदी से भी पीछे नहीं हटेगी। ऐसे में माना जा रहा है कि बैठक के बाद आंदोलन का रुख और अधिक आक्रामक हो सकता है।

राजस्व घटने से मंईयां सम्मान समेत योजनाओं पर असर का दावा
झामुमो का मानना है कि संशोधित कानून से खनिज संपदा वाले राज्यों के अधिकार और राजस्व प्रभावित होंगे। पार्टी इस मुद्दे को राज्य के आर्थिक अधिकारों से जोड़कर देख रही है।
झामुमो महासचिव विनोद पांडेय का दावा है कि प्रस्तावित बदलावों से झारखंड को हजारों करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। इसका सीधा असर मंईयां सम्मान योजना समेत कई कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस मुद्दे को केंद्र सरकार के सामने पहले ही उठा चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से विधेयक पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि खनिज संसाधनों से मिलने वाला राजस्व झारखंड की वित्तीय स्थिति और कल्याणकारी योजनाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी पत्र लिखकर इस मुद्दे पर सहयोग की अपील की है।
वामदलों ने भी किया राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान
झामुमो के विरोध के बीच राज्य के छह वामदलों ने भी MMDR संशोधन विधेयक, 2026 के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चलाने का फैसला लिया है। सीपीआई, सीपीएम, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन, एसयूसीआई (सी), फॉरवर्ड ब्लॉक और आरएसपी की संयुक्त बैठक में आंदोलन की रणनीति तय की गई।

रांची स्थित माकपा राज्य कार्यालय में हुई बैठक में फैसला लिया गया कि 25 से 31 अगस्त के बीच झारखंड के सभी जिलों के प्रखंडों, पंचायतों और नगर निकायों में संयुक्त रूप से विधेयक की प्रतियां जलाई जाएंगी। इसके साथ ही सार्वजनिक स्थानों पर नुक्कड़ सभाएं आयोजित की जाएंगी।
रांची में प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपेंगे ज्ञापन
वामदलों की ओर से राजधानी रांची में लोकभवन के समक्ष प्रदर्शन करने का भी निर्णय लिया गया है। प्रदर्शन के बाद राज्यपाल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
वामदलों का आरोप है कि संसद के दोनों सदनों में पर्याप्त चर्चा के बिना विधेयक को पारित कराया गया और इससे राज्यों के अधिकारों पर बड़ा असर पड़ेगा। उनका कहना है कि खनिज संपदा वाले राज्यों के राजस्व पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

13 हजार करोड़ के नुकसान का दावा
वामदलों ने दावा किया है कि MMDR विधेयक के कानून बनने से झारखंड जैसे खनिज बहुल राज्य को हर साल करीब 13 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। उनका कहना है कि राजस्व में कमी का असर सामाजिक सुरक्षा और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भी पड़ सकता है।

वामदलों ने केंद्र सरकार से विधेयक को वापस लेने की मांग की है और कहा है कि इसके खिलाफ आंदोलन को आने वाले दिनों में और व्यापक किया जाएगा।
आगे झारखंड बंद की भी तैयारी
वामदलों ने आंदोलन के अगले चरण में अन्य धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दलों और जनसंगठनों को साथ लेने का फैसला किया है। इसके बाद केंद्र सरकार के प्रतिष्ठानों का घेराव किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर झारखंड बंद की घोषणा भी की जाएगी।

इस तरह MMDR विधेयक को लेकर झामुमो और वामदलों का विरोध अब सड़क पर उतरने की दिशा में बढ़ता दिख रहा है। 20 अगस्त को झामुमो की बैठक के बाद आंदोलन की तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

बैठक में ये नेता रहे मौजूद
वामदलों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता भाकपा (माले) के राज्य सचिव मनोज भक्त ने की। बैठक में भाकपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक, अशोक यादव, माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, प्रफुल्ल लिंडा, समीर दास, सुखनाथ लोहरा, अमल आजाद, बीना, भाकपा (माले) के शुभेंदु सेन, सुदामा खलको, एसयूसीआई (सी) के मिंटू पासवान और दिलीप कुमार समेत विभिन्न वामदलों के नेता एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
वामदलों की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि MMDR विधेयक के खिलाफ संघर्ष को राज्यव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

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