“600+ School बंद, 4 लाख Students प्रभावित! Jhar Education System हिला”

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर रोज़गार समाचार

“600+ स्कूल बंद, 4 लाख छात्रों की पढ़ाई ठप!” — अनुदान कटौती पर बिहार में शिक्षा संकट गहराया

मुख्य बातें

  • 223 संस्थानों का अनुदान रोका गया
  • 600+ स्कूल-इंटर कॉलेज बंद, 1250 संस्थान प्रभावित
  • 4 लाख छात्रों की पढ़ाई पर असर
  • 10 हजार शिक्षक-कर्मचारी हड़ताल में शामिल
  • हाई कोर्ट जाने की तैयारी

अनुदान कटौती के खिलाफ राज्यव्यापी हड़ताल, शिक्षा व्यवस्था ठप

झारखंड में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के फैसले के खिलाफ आज पूरे राज्य में शैक्षणिक हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। दरअसल, 2025-26 वित्तीय वर्ष में 223 स्कूलों और इंटर कॉलेजों का अनुदान रोकने के फैसले ने शिक्षा जगत में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है।

इसके विरोध में मोर्चा के आह्वान पर 600 से अधिक अनुदानित स्कूल और इंटर कॉलेज पूरी तरह बंद रहे, जबकि कुल मिलाकर 1250 संस्थानों में शिक्षण कार्य ठप रहा। नतीजतन, पूरे राज्य की शिक्षा व्यवस्था चरमरा गई।

स्कूलों पर ताले, छात्र लौटे निराश

हड़ताल के कारण स्कूल-कॉलेजों के मुख्य द्वार पर ताले लटकते नजर आए। बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं पढ़ाई के लिए पहुंचे, लेकिन गेट बंद और शिक्षकों को धरने पर बैठा देखकर उन्हें वापस लौटना पड़ा।

हालांकि, कई जगहों पर छात्रों ने भी शिक्षकों के आंदोलन का समर्थन किया और सरकार के फैसले को मनमाना बताते हुए विरोध जताया।

धरना, उपवास और नारेबाजी — शिक्षकों का उग्र प्रदर्शन

करीब 10 हजार शिक्षक और कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हुए। कई जगहों पर शिक्षक उपवास पर बैठकर स्कूल गेट पर ही धरना देते दिखे।

शिक्षकों का आरोप है कि सरकार सुनियोजित तरीके से 25-30 वर्षों से चल रहे संस्थानों को बंद करने की साजिश कर रही है। उनका कहना है कि “वेतन नहीं मिलता, अनुदान ही एक सहारा था, अब उसे भी छीन लिया जा रहा है।”

“हिटलरशाही निर्णय” — सरकार पर गंभीर आरोप

मोर्चा नेताओं — गणेश महतो, अरविंद सिंह, मनीष कुमार और फजलुल कदीर अहमद — ने सरकार के इस फैसले को “शिक्षक विरोधी और हिटलरशाही” करार दिया।

उन्होंने दावा किया कि:

  • 2005-06 से लगातार संस्थानों को अनुदान मिलता आ रहा था
  • इस बार 90% से ज्यादा अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों का अनुदान रोक दिया गया
  • बिना ठोस प्रमाण के कार्रवाई की गई

Jharkhand Breaking News: स्कूलों में ताला, शिक्षक सड़क पर

अनुदान अधिनियम 2004 का उल्लंघन? उठे बड़े सवाल

मोर्चा ने आरोप लगाया कि यह फैसला अनुदान अधिनियम 2004 के प्रावधानों के खिलाफ है। नियमों के अनुसार:

  • राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्थान
  • सोसाइटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत निबंधन
  • 40% से अधिक परीक्षा परिणाम

इन मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों का अनुदान नहीं रोका जा सकता। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर नियमों को नजरअंदाज क्यों किया गया?

दोहरा मापदंड! कुछ को अनुदान, कुछ को रोक — क्यों?

मोर्चा ने यह भी आरोप लगाया कि परिवाद पत्र के आधार पर कई संस्थानों का अनुदान रोक दिया गया, जबकि कुछ संस्थानों को जांच लंबित होने के बावजूद अनुदान दे दिया गया।

यानी, एक ही नियम के तहत अलग-अलग फैसले — इससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

“भाषा पर सियासत! JTET में मगही-अंगिका हटाने पर RJD का हमला”

अब हाई कोर्ट की शरण में जाएगा मोर्चा

स्थिति को गंभीर बताते हुए मोर्चा ने साफ कर दिया है कि वे इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर करेंगे।

उनका कहना है कि यह निर्णय “अन्यायपूर्ण और षड्यंत्र से भरा हुआ” है, जिसे न्यायपालिका में चुनौती दी जाएगी।

02 अप्रैल को बड़ी बैठक, आंदोलन होगा और तेज

आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए 02 अप्रैल 2026 को सर्वोदय निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा (रांची) में राज्यस्तरीय बैठक बुलाई गई है।

इस बैठक में:

  • सभी अनुदानित संस्थानों के प्राचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि शामिल होंगे
  • आगे की रणनीति तय होगी
  • बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन की योजना बन सकती है

“आर-पार की लड़ाई” — मोर्चा का ऐलान

मोर्चा नेताओं ने साफ कहा है कि यह लड़ाई अब आर-पार की होगी। जब तक सभी संस्थानों को न्याय नहीं मिल जाता, आंदोलन जारी रहेगा।

उन्होंने दावा किया कि आज की हड़ताल पूरी तरह सफल रही और यह शिक्षकों की एकता का परिणाम है।

निष्कर्ष: शिक्षा पर संकट, सरकार पर दबाव

एक तरफ 4 लाख छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है, तो दूसरी तरफ 10 हजार से अधिक शिक्षक सड़कों पर हैं। ऐसे में यह मामला अब सिर्फ अनुदान का नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा सिस्टम के भविष्य का बन गया है।

अब सबकी नजर 2 अप्रैल की बैठक और संभावित कोर्ट की कार्रवाई पर टिकी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *