पलामू के किलों का होगा जीर्णोद्धार, बेतला में बनेगी टाइगर सफारी: 2027 तक पूरा होगा ड्रीम प्रोजेक्ट
प्रमुख बातें एक नजर में:
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पलामू के नए और पुराने किले के संरक्षण पर अनुमानित 40–50 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान
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बेतला के समीप 300 एकड़ में विकसित होगी टाइगर सफारी, लागत लगभग 215 करोड़ रुपये
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परियोजनाओं को 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य
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2025–26 के बजट भाषण में दोनों परियोजनाओं का हुआ था उल्लेख
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दी संवैधानिक सहमति
ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण को लेकर उच्चस्तरीय बैठक
12 जुलाई 2025 को पलामू क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासतों और पर्यावरणीय विकास को लेकर एक महत्वपूर्ण विभागीय बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक पर्यटन मंत्री सुधीर कुमार सोनू के सरकारी आवास पर हुई, जिसमें वन मंत्री राधाकृष्ण किशोर भी विशेष रूप से उपस्थित थे।
बैठक में अन्य वरिष्ठ अधिकारियों में वन एवं पर्यावरण सचिव अबूबकर सिद्दीकी, पर्यटन सचिव मनोज कुमार, संस्कृति निदेशक आसिफ एकराम, झारखंड राज्य वन निगम के प्रबंध निदेशक वाई. के. दास, और पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के निदेशक एस. आर. नाटेश शामिल थे।
पलामू के किलों के जीर्णोद्धार पर विस्तृत चर्चा
बैठक में पलामू का नया और पुराना किला, जिन्हें ऐतिहासिक धरोहर घोषित किया गया है, के संरक्षण और जीर्णोद्धार को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। बताया गया कि राजा मेदिनीराय द्वारा निर्मित इन किलों की ऐतिहासिक महत्ता को ध्यान में रखते हुए एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी।
इस रिपोर्ट को किसी अनुभवी और प्रमाणित कंसल्टेंसी एजेंसी द्वारा तैयार कराया जाएगा, जिसे बाद में तकनीकी स्वीकृति और वैटिंग (vetting) के लिए सक्षम प्राधिकरण के पास भेजा जाएगा। इन कार्यों पर 40 से 50 करोड़ रुपये खर्च होने की संभावना जताई गई है।
पर्यटन मंत्री सुधीर कुमार सोनू ने जानकारी दी कि इन किलों के संरक्षण कार्य का उल्लेख वर्ष 2025–26 के बजट भाषण में भी किया गया है।
बेतला में बनेगी भव्य टाइगर सफारी
बैठक के दौरान बेतला के समीप टाइगर सफारी के निर्माण को लेकर भी गंभीर चर्चा की गई। यह सफारी पलामू टाइगर प्रोजेक्ट के अंतर्गत 300 एकड़ में विकसित की जाएगी। इस परियोजना की लागत करीब 215 करोड़ रुपये आंकी गई है।
मंत्री सुधीर कुमार सोनू ने बताया कि इस योजना को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संवैधानिक सहमति प्राप्त हो चुकी है। वन विभाग ने स्पष्ट किया कि परियोजना हेतु भूमि का चयन कर लिया गया है और निर्माण की दिशा में कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा।
2027 तक पूरा होगा ड्रीम प्रोजेक्ट
बैठक के अंत में दोनों मंत्रियों ने उपस्थित अधिकारियों को निर्देश दिए कि पलामू किला संरक्षण और बेतला टाइगर सफारी, दोनों परियोजनाओं को ‘झारखंड के ड्रीम प्रोजेक्ट’ के रूप में प्राथमिकता दी जाए। सभी आवश्यक प्रक्रियाएं जल्द पूरी करते हुए 2027 तक कार्य पूर्ण करने का लक्ष्य सुनिश्चित किया जाए।
पर्यटन और विरासत संरक्षण की दिशा में मजबूत कदम
झारखंड सरकार ने इतिहास, पर्यावरण और पर्यटन को एक साथ जोड़ते हुए दो महत्त्वपूर्ण परियोजनाओं की रूपरेखा तय की है। जहां एक ओर पलामू के ऐतिहासिक किलों को संरक्षित कर नई पहचान दी जाएगी, वहीं दूसरी ओर बेतला में टाइगर सफारी पर्यटकों को एक नया अनुभव प्रदान करेगी।
