26 करोड़ श्रमिकों को प्रभावित करने वाला कानून बिना सार्वजनिक संवाद के पारित
रांची- केंद्र सरकार ने वर्ष 2005 के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह एक नया कानून “विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)”, जिसे वीबी ग्राम जी कानून 2025 कहा जा रहा है, को 18 दिसंबर 2025 को संसद के दोनों सदनों से पारित कर दिया। इस कानून से देश के लगभग 26 करोड़ ग्रामीण श्रमिक सीधे प्रभावित होंगे।
आरोप है कि यह कानून बिना किसी सार्वजनिक संवाद, बहस या मजदूर संगठनों से सलाह के, आनन-फानन में संसद से पारित कर दिया गया और इसे मजदूरों पर थोप दिया गया।
मनरेगा की तुलना में मजदूर विरोधी बताया जा रहा नया कानून
मनरेगा जहां मांग आधारित रोजगार, श्रम बजट और न्यूनतम 100 दिनों के काम की गारंटी देता था, वहीं नया वीबी ग्राम जी कानून इन बुनियादी प्रावधानों को कमजोर करता नजर आ रहा है। विशेषज्ञों और मजदूर संगठनों का कहना है कि यह कानून ग्रामीण अर्थव्यवस्था और गरीब मजदूरों के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
झारखंड में वीबी ग्राम जी कानून के संभावित दुष्प्रभाव
नॉर्मेटिव एलोकेशन और 60 दिन का कार्य स्थगन बड़ी चिंता
झारखंड जैसे राज्यों के लिए यह कानून कई स्तरों पर गंभीर संकट पैदा कर सकता है।
श्रम बजट की जगह नॉर्मेटिव एलोकेशन, मजदूरी दर का केंद्रीकरण और 60 दिनों का अनिवार्य कार्य स्थगन ऐसे प्रावधान हैं, जो भूमिहीन मजदूरों को सीधे संकट में डाल सकते हैं।
इसके चलते:
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पलायन बढ़ने का खतरा
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भुखमरी की स्थिति
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कृषि और बागवानी योजनाओं पर नकारात्मक असर
जैसी समस्याएं गहराने की आशंका जताई जा रही है।
बायोमेट्रिक अटेंडेंस और राज्यों पर बढ़ेगा वित्तीय बोझ
इसके अलावा, बायोमेट्रिक अटेंडेंस प्रणाली को अनिवार्य करने और 40 प्रतिशत वित्तीय भार राज्यों पर डालने के फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं।
अनुमान है कि इससे झारखंड पर करीब 2000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा, जिसे वहन करना राज्य के लिए व्यावहारिक रूप से कठिन होगा।
मजदूर संगठनों का कहना है कि राज्यों को विश्वास में लिए बिना ऐसी योजना लागू करना संघीय ढांचे पर सीधा हमला है।
मनरेगा बचाओ आंदोलन को तेज करने की घोषणा
2 फरवरी को रांची में 5000 मजदूरों की रैली
इसी बीच, झारखंड नरेगा वाच ने वीबी ग्राम जी कानून के खिलाफ बड़े आंदोलन की घोषणा की है।
आगामी 2 फरवरी, नरेगा दिवस के अवसर पर रांची में कम से कम 5000 मजदूरों के साथ
“मनरेगा बचाओ! वीबी ग्राम जी कानून हटाओ!”
के नारे के साथ विशाल रैली आयोजित की जाएगी।
100 दिनों के रोजगार के लिए युद्धस्तर पर अभियान
संगठन ने यह भी ऐलान किया है कि अगले 5 महीनों में युद्धस्तर पर काम मांगो अभियान चलाया जाएगा, जिसके तहत
1 लाख मजदूरों को 100 दिनों का रोजगार और मजदूरी दिलाने का लक्ष्य रखा गया है।
इसे मनरेगा के “पुनर्जागरण काल” के रूप में देखा जा रहा है।
2000 ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पारित कराने की तैयारी
इसके अलावा:
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2000 ग्राम सभाओं से वीबी ग्राम जी कानून के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर
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इन्हें झारखंड सरकार और केंद्र सरकार को भेजा जाएगा
ताकि जनभावनाओं को औपचारिक रूप से सरकार तक पहुंचाया जा सके।
बजट सत्र में प्रस्ताव लाने का दबाव
मजदूर संगठनों की मांग है कि झारखंड सरकार आगामी बजट सत्र में
पंजाब और कर्नाटक सरकार की तर्ज पर
वीबी ग्राम जी कानून के विरोध में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजे।
इसके लिए राज्य सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दबाव बनाया जाएगा।
संयुक्त जन आंदोलन की तैयारी
अंत में, यह भी स्पष्ट किया गया है कि:
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विपक्षी राजनीतिक दलों
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सहमना जनसंगठनों
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किसान संगठनों
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ट्रेड यूनियनों
के साथ लगातार बैठकें, परिचर्चाएं और सेमिनार आयोजित कर
मनरेगा बचाओ जन अभियान को राज्यभर में तेज किया जाएगा।
वीबी ग्राम जी कानून को लेकर झारखंड में बढ़ता असंतोष अब संगठित आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी बड़ा सवाल बन सकता है।
