जैक की लापरवाही पर भड़का मोर्चा, 21 नवंबर को घेराव.

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जैक की लापरवाही पर भड़का संघर्ष मोर्चा, 21 नवंबर को जैक कार्यालय का होगा घेराव

मुख्य बिंदु:

वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा 21 नवंबर को करेगा जैक कार्यालय का घेराव

अधिनियम और नियमावली के उल्लंघन का आरोप

8 वर्षों से परीक्षा नियंत्रक का पद खाली

शासी निकाय गठन और अनुदान में देरी पर रोष

कार्रवाई न होने पर मुख्यमंत्री आवास घेरने की चेतावनी

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बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया निर्णय

रांची | वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने झारखंड अकादमिक काउंसिल (JAC) की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। मोर्चा की अध्यक्ष मंडल की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि 21 नवंबर 2025 को जैक कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ नेता हरिहर प्रसाद कुशवाहा ने की। इस दौरान सभी सदस्यों ने कहा कि जैक न तो अधिनियम, परिनियम और नियमावली के अनुसार कार्य कर रहा है, न ही बोर्ड की नियमित बैठकें हो रही हैं।

जैक की बैठकों में भारी लापरवाही

मोर्चा के सदस्यों ने बताया कि अधिनियम के अनुसार हर तीन माह में जैक बोर्ड की बैठक अनिवार्य है, लेकिन पांच महीने बीत जाने के बाद भी कोई बैठक नहीं हुई।
विगत कई वर्षों से पाठ्यक्रम पर भी कोई विचार-विमर्श नहीं हुआ है, जबकि CBSE हर तीन महीने में नई परिस्थितियों के अनुसार बदलाव करता है।

सदस्यों ने कहा कि जैक में पुराना पाठ्यक्रम ही चल रहा है और पिछले छह महीनों में CBSE ने कई अकादमिक सुधार किए हैं, लेकिन झारखंड बोर्ड में कोई बदलाव नहीं हुआ।

शासी निकाय गठन में देरी और अनुदान का संकट

मोर्चा ने कहा कि शासी निकाय का गठन समय पर नहीं होने के कारण वित्तीय वर्ष 2024-25 में 40 से अधिक स्कूल-इंटर कॉलेजों के अनुदान रुक गए थे।
बाद में मोर्चा के विरोध के बाद ही जैक ने आंशिक कार्रवाई की, जिसके बाद अपीलिए आवेदन के आधार पर अनुदान स्वीकृत किया गया।

इसके अलावा, अधिनियम में प्रावधान है कि शासी निकाय के सदस्य निकटवर्ती संस्था से होंगे, लेकिन जैक द्वारा अन्य जिलों के प्रतिनिधियों की नियुक्ति की जा रही है। इससे स्कूलों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है।

वेतन और पद रिक्तियों पर उठाए सवाल

मोर्चा ने बताया कि 2010 से अब तक परीक्षकों के रेम्यूनरेशन, ठहराव भत्ता और अन्य भुगतान दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई है, जबकि महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है।
साथ ही परीक्षा नियंत्रक का पद पिछले आठ वर्षों से खाली है, जबकि हर साल करीब 24 लाख विद्यार्थी विभिन्न परीक्षाओं में सम्मिलित होते हैं।

अकादमिक ऑफिसर और वित्त पदाधिकारी संविदा पर कार्यरत हैं, जो अधिनियम के नियमों का उल्लंघन है।

लंबित फाइलें और योजनाओं में ठहराव

मोर्चा ने बताया कि 50 से अधिक स्कूल-कॉलेजों की प्रशवीकीर्ति (Affiliation) संबंधी फाइलें विभाग में लंबित हैं। इसके अलावा सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का पोर्टल अनुदानित स्कूलों के लिए अब तक काम नहीं कर रहा।
नियमावली में स्पष्ट है कि अनुदानित स्कूलों को इस योजना का लाभ मिलेगा, लेकिन एक भी संस्थान को अभी तक इसका लाभ नहीं मिला है।

सरकार को सौंपे जाएंगे ज्ञापन

बैठक में निर्णय लिया गया कि इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और समाज कल्याण विभाग के सचिव को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
मोर्चा ने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो वह मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए बाध्य होगा।

इसके अलावा, 75% अनुदान राशि बढ़ोतरी प्रस्ताव अब तक कैबिनेट में नहीं रखा गया है। इस पर मोर्चा शिक्षा सचिव से मिलकर ज्ञापन सौंपेगा और मुख्य सचिव से वार्ता करेगा।

न्यायालय जाने की चेतावनी

बैठक में राज्य कर्मियों पर कार्रवाई न होने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। मोर्चा ने कहा कि यदि स्थिति नहीं बदली, तो वह उच्च न्यायालय की शरण लेगा। साथ ही चेतावनी दी कि यदि 75% अनुदान बढ़ोतरी पर निर्णय नहीं लिया गया, तो कोई भी स्कूल या कॉलेज वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान का ऑनलाइन आवेदन नहीं करेगा।

बैठक में शामिल रहे ये प्रतिनिधि

बैठक में रघुनाथ सिंह, गणेश महतो, देवनाथ सिंह, संजय कुमार, मनीष कुमार, पशुपति महतो, रेशमा बैक, फजलुल कादरी अहमद, नरोत्तम सिंह, रघु विश्वकर्मा, मनोज कुमार, राजेश बरला, विजय राम, अर्जुन पांडे और अशोक कुमार मौजूद रहे।

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