नई नियुक्ति नियमावली पर भड़का उर्दू शिक्षक संघ, झारखंड सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
“माध्यमिक आचार्य” पद के जरिए शिक्षकों के सम्मान और वेतन में कटौती, संघ ने चेताया – आंदोलन होगा
प्रमुख बिंदु:
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JTET 2025 भर्ती विज्ञापन पर झारखंड राज्य उर्दू शिक्षक संघ ने जताई गहरी आपत्ति
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TGT-PGT पद समाप्त कर “माध्यमिक आचार्य” नाम से नया पद, वेतन में भारी गिरावट
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एक शिक्षक को 9वीं से 12वीं तक पढ़ाने का दबाव, शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ेगा
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विद्यालय प्रमुख पदों के ग्रेड पे में भी कटौती, गुणवत्ता पर पड़ेगा असर
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सरकार को चेतावनी – पूर्व व्यवस्था लागू नहीं हुई तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन
JTET विज्ञापन पर संघ की कड़ी प्रतिक्रिया
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा 10 जून 2025 को जारी किए गए JTET 2025 (विज्ञापन संख्या 02/2025) पर राज्य उर्दू शिक्षक संघ ने गहरी आपत्ति जताई है। संघ ने कहा कि यह विज्ञापन न केवल राज्य के शिक्षित बेरोजगार युवाओं के साथ छल है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की नींव को भी कमजोर करता है।
“माध्यमिक आचार्य” पद: वेतन और पदनाम में गिरावट
संघ के केंद्रीय महासचिव अमीन अहमद ने कहा कि सरकार सुनियोजित रणनीति के तहत TGT (प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक) और PGT (स्नातकोत्तर शिक्षक) जैसे सम्मानजनक पदों को खत्म कर रही है। उनकी जगह “माध्यमिक आचार्य” नामक पद लाया गया है, जिसमें वेतनमान में भारी गिरावट की गई है।
उन्होंने बताया कि पहले TGT को 4600 रुपये ग्रेड पे व 44,900 रुपये बेसिक वेतन और PGT को 4800 रुपये ग्रेड पे व 47,600 रुपये मिलता था। जबकि अब “माध्यमिक आचार्य” के पद पर नियुक्ति 4200 रुपये ग्रेड पे व मात्र 35,400 रुपये बेसिक वेतन पर की जाएगी। यह शिक्षकों के मनोबल को तोड़ेगा और पेशे से योग्य अभ्यर्थियों का मोहभंग करेगा।
एक शिक्षक, चार कक्षाएं: बढ़ेगा कार्यभार
संघ का कहना है कि नयी व्यवस्था में एक ही शिक्षक को कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने की बाध्यता दी गई है। इससे शिक्षकों पर कार्यभार असामान्य रूप से बढ़ेगा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
साथ ही, विद्यालयों में प्रधानाध्यापक और प्राचार्य के पदों को समाप्त कर “संयुक्त प्रधानाचार्य” नामक एक नया पद बनाया गया है, जिसका ग्रेड पे सिर्फ 4800 रुपये तय किया गया है। जबकि पहले यह ग्रेड पे क्रमश: 5400 और 7600 रुपये था।
केंद्रीय मानकों से क्यों हट रही झारखंड सरकार?
संघ ने यह भी सवाल उठाया कि जब केंद्रीय विद्यालय संगठन में अब भी TGT और PGT पद मौजूद हैं, तो झारखंड सरकार उन्हें क्यों समाप्त कर रही है? क्या यह नई शिक्षा नीति 2020 की आड़ में शिक्षकों के हितों का शोषण नहीं है?
3712 रिक्त पद अब भी लंबित
संघ ने यह भी बताया कि झारखंड को अविभाजित बिहार से योजना मद में 4401 सहायक शिक्षक (उर्दू) पद मिले थे, जिनमें अब तक सिर्फ 689 पर ही नियुक्ति हो सकी है। 2023 में शेष 3712 पदों को गैर-योजना मद में स्थानांतरित कर दिया गया, बावजूद इसके अब तक बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
कम वेतन = शिक्षकों का अपमान
संघ के प्रवक्ता शहजाद अनवर ने कहा कि शिक्षकों को कम वेतनमान देकर अपमानित किया जा रहा है, जो न केवल उनके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाता है, बल्कि राज्य के युवाओं के भविष्य के साथ भी अन्याय है। उन्होंने सरकार को चेताया कि यदि यह नियमावली वापस नहीं ली गई तो राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा।
सरकार से हस्तक्षेप की मांग
संघ ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और शिक्षा मंत्री से अपील की है कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और नयी नियुक्ति नियमावली को निरस्त कर शिक्षकों को पुरानी व्यवस्था के अनुरूप बहाल करें। संघ ने चेतावनी दी कि यदि यह निर्णय वापस नहीं हुआ, तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था को अपूरणीय क्षति होगी।
