टेंडर कमीशन घोटाला मामले में गिरफ्तार झारखंड के कैबिनेट मंत्री आलमगीर आलम से आज से पूछताछ शुरू होगी। केंद्रीय जांच एजेंसी ED को 6 दिनों की रिमांड मिली है। इन 6 दिनों में ई़डी हर सवाल का जवाब लेना चाहेगी।
पीएमएलए कोर्ट में ईडी ने बताया कि, मंत्री आलमगीर आलम को टेंडर का 1.5% कमीशन के रूप में मिलता था। यही कमीशन का पैसे संजीव लाल के नौकर जहांगीर आलम के आवास से बरामद गया था। ईडी ने कोर्ट को यह भी बताया है कि, इस पूरे सिंडिकेट में ग्रामीण विकास विभाग के चीफ इंजीनियर रहे वीरेंद्र राम की सबसे अहम भूमिका रही है। उनके समय से ही यह सिंडिकेट चल रहा है। वीरेंद्र राम को ईडी ने 22 सितंबर 2023 को गिरफ्तार किया था।
कोर्ट में ईडी के बयान के बाद क्या अब अन्य अधिकारियों की भी गिरफ्तारी मुमकिन है। मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो एक दर्जन से ज्यादा अधिकारी टेंडर कमीशन के नेक्सस में शामिल हैं। कई नाम तो गिरफ्तार पीएस संजीव लाल ने ईडी को बताया है। कई नाम उनके नौकर जहांगीर ने पूछताछ में जानकारी दी है। अब उन अधिकारियों को समन कर पूछताछ के लिए ईडी बुला सकती है ताकि इस पूरे नेक्सस का खुलासा हो सके।
पिछले करीब सीढ़े चार साल से आलमगीर आलम ग्रामीण विकास विभाग का कामकाज देख रहे हैं। उनके कार्यकाल में अब तक सैंकड़ो टेंडर जारी किए गए हैं। ईडी की माने हैं तमाम टेंडर में डेढ़ प्रतिशत कमीशन विभाग के मंत्री लेते थे। ऐसे में आलमगीर आलम की संपत्ति की भी जांच हो सकती है।
राजनीतिक नजरिया से इस खबर को देखें तो कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। विधायक दल के नेता होने के साथ ही आलमगीर आलम पार्टी के एक वरिष्ठ नेता हैं। पाकुड़ से विधायक होने की वजह से संथाल के अन्य क्षेत्रों में उनकी पकड़ रही है। लोकसभा चुनाव के बीच में उनकी गिरफ्तारी से कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। हालांकि पार्टी नेता इससे इनकार करते हैं। पार्टी इसे राजनीतिक गिरफ्तारी के तौर पर देख रही है।
