झारखंड में गुड सेमेरिटन पॉलिसी का असर दिखने लगा, 200 से अधिक नागरिकों ने बचाई घायलों की जान
मुख्य बिंदु:
-
सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं आम नागरिक
-
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पहल पर लागू हुई स्टेट गुड सेमेरिटन पॉलिसी
-
अब तक 200 से अधिक लोगों को मिला ₹2000 का प्रोत्साहन
-
परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ बोले – “अबुआ जोहार उन मददगारों को, जो इंसानियत निभा रहे हैं”
रांची से चक्रधरपुर तक दिखा मानवता का चेहरा
रांची, 10 अक्टूबर 2025- झारखंड में सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद के लिए आम नागरिक अब बढ़-चढ़कर सामने आ रहे हैं। पहले जहां लोग पुलिस झंझट या कानूनी पूछताछ के डर से सड़क किनारे पड़े घायल को नजरअंदाज कर देते थे, अब वहीं लोग बिना झिझक मदद के लिए हाथ बढ़ा रहे हैं। दरअसल, यह बदलाव मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा शुरू की गई स्टेट गुड सेमेरिटन पॉलिसी का नतीजा है, जिसका असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
वास्तविक उदाहरणों से बदल रही सोच
हाल ही में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां आम लोगों ने घायल व्यक्तियों को समय पर अस्पताल पहुंचाकर उनकी जान बचाई।
जैसे, चक्रधरपुर निवासी राजेश तिवारी ने रेलवे लाइन के पास एक वृद्ध को घायल अवस्था में देखा और बिना देर किए उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) चक्रधरपुर ले गए। उनके इस कदम से वृद्ध की जान बच सकी।
इसी तरह, पूर्वी सिंहभूम के मजरूल हक ने सड़क किनारे घायल पड़े सांगी गोप को अस्पताल पहुंचाया। उनके सिर पर गंभीर चोट लगी थी, लेकिन समय पर उपचार मिलने से वे अब सुरक्षित हैं।
वहीं, सिद्धार्थ होनहागा ने पुरनिया कुटपानी में सड़क दुर्घटना में घायल रामसिंह टियू और दसमती टियू की मदद की और उन्हें नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।
इन तीनों घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि अब आम नागरिक न सिर्फ संवेदनशील हो रहे हैं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं।
दीपावली से पहले सरकार ने पेंशनधारियों को दी बड़ी राहत, 23.94 करोड़ की राशि जारी
नीति से मिली कानूनी सुरक्षा और प्रोत्साहन
झारखंड सरकार की यह योजना नागरिकों को कानूनी सुरक्षा और आर्थिक प्रोत्साहन दोनों देती है। इस नीति के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति से पुलिस कोई अनावश्यक पूछताछ नहीं करेगी।
साथ ही, उसकी मदद की सराहना के तौर पर ₹2000 की प्रोत्साहन राशि राज्य सरकार की ओर से दी जाएगी।
सड़क सुरक्षा विभाग के अनुसार, अब तक 200 से अधिक नागरिकों ने इस योजना का हिस्सा बनते हुए घायलों की जान बचाई है।
दीपक बिरुआ का संदेश – “सरकार आपके साथ है”
राज्य के परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ ने सोशल मीडिया पर इस मुहिम की सफलता साझा की। उन्होंने लिखा –
“सभी से आग्रह है कि आगे बढ़कर सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की मदद करें। सरकार आपके साथ है। सभी ईश्वर रूपी मददगारों को अबुआ जोहार!”
उनका यह संदेश न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि जनता को भरोसा भी दिलाता है कि सरकार उनके साथ खड़ी है।
नीति लागू होने के बाद घटी सड़क हादसों में मृत्यु दर
स्टेट गुड सेमेरिटन पॉलिसी के लागू होने के बाद सड़क दुर्घटनाओं में मृत्यु दर में कमी दर्ज की गई है। पहले कई लोग “कानूनी प्रक्रिया” के डर से घायलों को अस्पताल नहीं पहुंचाते थे, जिससे गोल्डन ऑवर में इलाज न मिल पाने से मौतें होती थीं।
अब स्थिति बदल रही है। अस्पतालों में आने वाले ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जहां घायल व्यक्ति किसी नेक नागरिक की मदद से समय पर इलाज पा रहा है।
चिकित्सकों का भी कहना है कि सड़क हादसे के पहले घंटे को “गोल्डन ऑवर” कहा जाता है, और उसी दौरान यदि घायल को अस्पताल पहुंचा दिया जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सरकार की पहल से बढ़ा भरोसा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की इस पहल ने न केवल झारखंड की सड़क सुरक्षा नीति को मजबूत किया है, बल्कि लोगों में भरोसा भी जगाया है। अब आम लोग समझने लगे हैं कि किसी घायल की मदद करना किसी मुसीबत को न्योता देना नहीं है, बल्कि यह मानवता का सबसे बड़ा धर्म है।
परिवहन विभाग की ओर से भी लगातार जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। शहरी और ग्रामीण दोनों इलाकों में पंपलेट, रेडियो और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को बताया जा रहा है कि “घायल की मदद करने वाला व्यक्ति किसी भी कानूनी कार्रवाई से सुरक्षित है।”
मानवता की दिशा में राज्य की पहल
झारखंड सरकार की यह योजना सामाजिक दृष्टि से भी बेहद प्रभावशाली साबित हो रही है। इससे न केवल सड़क दुर्घटना में मरने वालों की संख्या घट रही है, बल्कि समाज में “एक-दूसरे के लिए जिम्मेदारी” की भावना भी विकसित हो रही है।
राज्य के विभिन्न जिलों से आ रहे आंकड़े बताते हैं कि नीति लागू होने के बाद से सड़क पर घायल व्यक्ति को देखकर लोग अब रुकने लगे हैं, मदद कर रहे हैं और अस्पताल तक पहुंचा रहे हैं।
मानवता की नई मिसाल
झारखंड की गुड सेमेरिटन पॉलिसी अब सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि समाज में मानवता को पुनर्जीवित करने का आंदोलन बन चुकी है।
राजेश तिवारी, मजरूल हक और सिद्धार्थ होनहागा जैसे लोग अब पूरे राज्य के लिए उदाहरण हैं।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और परिवहन मंत्री दीपक बिरुआ की यह पहल झारखंड को एक ऐसे समाज की दिशा में ले जा रही है, जहां इंसानियत सबसे बड़ी पहचान है।
