शिबू सोरेन को नम आंखों से याद करते हुए भावुक हुईं कल्पना सोरेन, सोशल मीडिया पोस्ट में जताया दर्द
मुख्य बिंदु
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झारखंड के ‘बाबा’ शिबू सोरेन को याद कर पत्नी कल्पना सोरेन ने भावुक पोस्ट साझा किया
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खुद को बहू नहीं, बेटी बताते हुए दी श्रद्धांजलि
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शिबू सोरेन के व्यक्तित्व, सादगी और संघर्ष को किया याद
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कहा – “आपका सपना अब हमारी जिम्मेदारी है”
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झारखंड की हर बेटी की ओर से किया प्रणाम
रांची, 8 अगस्त 2025- झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर है। इसी बीच, उनकी बहू और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया है, जिसमें उन्होंने ‘बाबा’ को न केवल अपना ससुर, बल्कि झारखंड का पिता समान बताया।
कल्पना सोरेन ने लिखा –
“प्रिय बाबा,
जब पूरा देश आपको अश्रुपूरित नेत्रों से विदा कर रहा है, मैंने एक कोना पकड़ लिया है, अपनी आधी जिंदगी जिस वटवृक्ष के साये में महफ़ूज़ होकर काटी – आज आपके जाने से वह बेटी-सी बहू अपनी टूटी हुई हिम्मत बटोरने का साहस नहीं कर पा रही है।
मैं जानती हूं, आप सिर्फ मेरे ससुर नहीं थे, आप झारखंड के बाबा थे हर उस बच्चे के, जिसने जंगलों की गोद में जन्म लिया और संघर्ष को पहली सांस में महसूस किया।”https://newsmonitor.in/is-hemant-sorens-new-political-chapter-starting-from-nemra/
सादगी और दूरदर्शिता का किया स्मरण
कल्पना सोरेन ने अपने संदेश में लिखा कि जब वह पहली बार इस परिवार में आईं तो उन्हें शिबू सोरेन के व्यक्तित्व पर गर्व हुआ। उन्होंने लिखा –
“आपकी सादगी, आपकी आवाज़ में ठहराव और सबसे जरूरी आपका सुनना… आप सुनते थे हर किसान की चिंता, हर औरत का दर्द, हर मां की खामोशी और हर झारखंडी के अरमान। आपने राजनीति को घर की तरह जिया, जहाँ सत्ता नहीं, संबंधों का सम्मान होता है। आपके पास बड़ी डिग्रियों से भी बड़ी – दृष्टि दूरदर्शी थी।”
झारखंड के लिए बाबा का सपना
पोस्ट में उन्होंने कहा –
“आपने केवल झारखंड को खड़ा नहीं किया, हम सबको आत्मनिर्भर होने का हौसला दिया। जब आप ‘झारखंड’ कहते थे, तो वो शब्द भूगोल नहीं, संवेदना बन जाता था। बाबा, मैंने आपको कभी पिता की तरह देखा, कभी एक संत की तरह, और कभी एक तपस्वी की तरह, जो न सत्ता चाहता था, न वाहवाही, बस अपनी माटी और अपने लोगों की इज्जत चाहता था।”
हर गांव में गूंजेगी चाल की आहट
भावुक अंदाज में कल्पना सोरेन ने लिखा –
“आज आप नहीं हैं, पर आपकी चाल की गूंज हर गांव के रास्ते पर है। आपकी चप्पलों की खामोशी हर विधानसभा में गूंज रही है। बाबा, आपने झारखंड को छोड़ा नहीं है, आप तो हर उस बेटी की आंख में हैं, जो अपने जंगल, अपने खेत, अपने सपनों को बचाना चाहती है।”
अंत में किया वादा
अपनी पोस्ट के अंत में कल्पना सोरेन ने लिखा –
“आप हर उस मां की सांस में हैं, जो चाहती है कि उसके बेटे भी एक दिन आपकी तरह ‘गुरु’ एवं सच्चे इंसान बने। आपका सपना, अब हमारी जिम्मेदारी है। मैं, एक बहू नहीं, आपकी बेटी, आपसे वादा करती हूं – ‘आपका नाम सिर्फ इतिहास में नहीं रहेगा, वो हर लड़की के साहस में, हर गांव के संघर्ष में और झारखंड की हर सांस में जिंदा रहेगा।’
आपको झारखंड की हर बेटी का नम्र प्रणाम। आप हमारे संस्कार बन गए हैं। आपके बिना जीना मुश्किल है, पर आपके सपनों को जीना अब हमारा धर्म है।”
यह पोस्ट झारखंड के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में शिबू सोरेन के योगदान की गहरी छाप और उनके परिवार के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती है।
