नेमरा में दिवंगत माता रूपी सोरेन की तस्वीर के सामने पारंपरिक रस्म निभाते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन

मां के श्राद्धकर्म में हेमंत सोरेन ने निभाई खास रस्म, जानिए पूरी बात

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

हेमंत सोरेन ने मां के श्राद्धकर्म में निभाई परंपरा, नेमरा से सामने आईं तस्वीरें

झारखंड की राजनीति में सोरेन परिवार का नेमरा से गहरा रिश्ता रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी दिवंगत माता रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के दौरान रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित पैतृक आवास पर पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन कर रहे हैं। इस दौरान उन्होंने दातून, पानी और भोजन परोसने की पारिवारिक रस्म निभाई तथा अपनी माता को श्रद्धापूर्वक याद किया।

प्रमुख बातें

  • मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नेमरा स्थित पैतृक आवास पर पारंपरिक रस्म निभाई।
  • दिवंगत माता रूपी सोरेन की स्मृति में दातून, पानी और भोजन परोसने की परंपरा का पालन किया।
  • मुख्यमंत्री ने परिवारजनों के साथ स्थानीय सामाजिक और पारिवारिक रीति-रिवाजों का निर्वहन किया।
  • रूपी सोरेन का झारखंड आंदोलन और झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़े सोरेन परिवार के राजनीतिक सफर में महत्वपूर्ण स्थान रहा है।

नेमरा में पारंपरिक रीति-रिवाजों का निर्वहन

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी माता स्व. रूपी सोरेन के श्राद्धकर्म के तहत नेमरा स्थित पैतृक आवास पर परिवार के सदस्यों के साथ पारंपरिक रस्में निभाईं। इस दौरान उन्होंने दातून, पानी और भोजन परोसने की रस्म पूरी की। साथ ही माता की स्मृति में श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें याद किया।
यह आयोजन सोरेन परिवार की पारिवारिक परंपराओं और स्थानीय सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुरूप हुआ। मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम की तस्वीरें सामने आई हैं।

झारखंड की राजनीति में रूपी सोरेन की भूमिका

रूपी सोरेन का परिचय केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां तक सीमित नहीं रहा। वह झारखंड आंदोलन से जुड़े शिबू सोरेन की जीवनसंगिनी थीं और लंबे राजनीतिक संघर्ष के दौरान परिवार के साथ खड़ी रहीं।
1999 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने दुमका सीट से चुनाव भी लड़ा था। उस चुनाव में उनका मुकाबला भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी से हुआ था। वह बेहद कम अंतर से चुनाव हार गई थीं। यह चुनाव उस दौर में संताल परगना की राजनीति में सोरेन परिवार के प्रभाव और राजनीतिक मुकाबले के लिहाज से उल्लेखनीय रहा।

शिबू सोरेन के बाद परिवार पर एक और दुख

रूपी सोरेन का निधन अक्टूबर 2026 में 75 वर्ष की उम्र में हुआ। इससे पहले अगस्त 2025 में झारखंड आंदोलन के प्रमुख नेता और झामुमो के संस्थापक नेताओं में शामिल शिबू सोरेन का निधन हुआ था। लगातार दो वर्षों में परिवार के दोनों वरिष्ठ सदस्यों को खोना सोरेन परिवार के लिए बड़ा व्यक्तिगत नुकसान है।
शिबू सोरेन और रूपी सोरेन का जीवन झारखंड आंदोलन तथा झामुमो के राजनीतिक इतिहास से जुड़ा रहा है। ऐसे में उनके परिवार से जुड़े घटनाक्रमों पर राज्य के राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई है।

नेमरा से जुड़ा है सोरेन परिवार का राजनीतिक सफर

रामगढ़ जिले का नेमरा गांव सोरेन परिवार का पैतृक गांव है। यह गांव परिवार की सामाजिक जड़ों और राजनीतिक यात्रा के संदर्भ में विशेष महत्व रखता है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का यहां पारंपरिक रीति-रिवाजों में शामिल होना पारिवारिक परंपरा के निर्वहन के साथ अपने पैतृक गांव से उनके जुड़ाव को भी सामने लाता है।
फिलहाल, मुख्यमंत्री अपनी दिवंगत माता की स्मृति में पारंपरिक रस्में निभा रहे हैं। इस दौरान परिवार के सदस्य और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे।

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