हेमंत सरकार पर अमित मंडल का तीखा प्रहार: ‘यह अबुआ नहीं बबुआ सरकार है’
मुख्य बिंदु:
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हेमंत सरकार पर भाषाई अस्मिता को खत्म करने का आरोप
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स्थानीय भाषाओं को J-TET और जनगणना से हटाने का विरोध
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भाजपा प्रवक्ता अमित मंडल ने सरकार को चेताया –
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“भाजपा और जनजातीय समाज मिलकर आंदोलन करेगा”
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भाषाओं की उपेक्षा को बताया युवाओं के साथ धोखा
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क्षेत्रीय मंत्रियों और विधायकों की चुप्पी पर सवाल
हेमंत सरकार पर भाषा विवाद को लेकर बड़ा हमला
गोड्डा के पूर्व विधायक एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित मंडल ने आज प्रेस वार्ता कर हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि यह सरकार भाषा के नाम पर जनता को आपस में लड़वाकर राजनीतिक लाभ उठाना चाहती है। मंडल ने तीखा तंज कसते हुए कहा, “यह अबुआ नहीं, बबुआ सरकार है।”
“भाषा और पहचान से कर रही है खिलवाड़”
अमित मंडल ने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार झारखंड की मूल भाषाओं, संस्कृति और जनजातीय पहचान को मिटाने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि मुंडारी (खूंटी), भोजपुरी (पलामू-गढ़वा), अंगिका और कुड़ुख (गोड्डा) जैसी भाषाओं को न केवल J-TET 2025 परीक्षा से हटाया गया, बल्कि जनगणना फॉर्म से भी गायब कर दिया गया, वो भी बिना जनसंख्या आंकड़े जुटाए।
भाजपा ने जताया विरोध, लेकिन JTET में जारी है अन्याय
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि पार्टी किसी भाषा के खिलाफ नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय भाषाओं को नजरअंदाज करना युवाओं के साथ अन्याय है। मंडल ने याद दिलाया कि जब भाजपा की सरकार थी, तब मंत्री मिथिलेश ठाकुर और सांसद निशिकांत दुबे के प्रयासों से भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा में जोड़ा गया था। लेकिन मौजूदा सरकार ने फिर से उसे हटा दिया।
“कैबिनेट ने अनसुनी की क्षेत्रीय प्रतिनिधियों की मांग”
मंडल ने बताया कि मंत्री राधाकृष्ण किशोर और विधायक दीपिका पांडे सिंह ने अंगिका को क्षेत्रीय भाषा में शामिल करने की लिखित मांग की थी, लेकिन कैबिनेट ने उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब खुद विधायक और मंत्री अंगिका में शपथ लेते हैं, तो फिर उसे परीक्षा से क्यों हटाया गया?
क्षेत्रीय अस्मिता का अपमान, युवाओं से धोखा
भाजपा नेता ने कहा कि झारखंड के युवाओं के साथ यह दोहरा व्यवहार खतियानी पहचान की आड़ में किया जा रहा है। एक तरफ सरकार खतियानी नीति की बात करती है, दूसरी तरफ अंगिका जैसी भाषाओं को हटा कर उन युवाओं को धोखा देती है जो इन्हीं भाषाओं में पढ़े-लिखे हैं।
“क्या गोड्डा, पलामू, गढ़वा झारखंड का हिस्सा नहीं?”
मंडल ने तीखे सवाल करते हुए कहा कि यदि गोड्डा, पलामू और गढ़वा झारखंड के ही जिले हैं, तो वहां की भाषाओं को परीक्षा प्रक्रिया से बाहर क्यों किया गया? क्या इन जिलों की अस्मिता और भाषाई पहचान कोई मायने नहीं रखती?
सत्ता पक्ष के मंत्रियों और सांसदों पर भी उठाए सवाल
भाषा के सवाल पर अमित मंडल ने सत्ता पक्ष के नेताओं को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा:
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“मंत्री राधाकृष्ण किशोर बताएं कि पलामू-गढ़वा में मगही बोली जाती है या नहीं?”
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“दीपिका पांडे सिंह बताएं कि गोड्डा में अंगिका नहीं बोली जाती?”
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“संजय यादव और कालीचरण मुंडा को क्या यह नहीं पता कि गोड्डा और खूंटी में अंगिका और मुंडारी की बहुलता है?”
आंदोलन की चेतावनी
अमित मंडल ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने भाषाओं के साथ अन्याय जारी रखा, तो भाजपा जनजातीय समाज के साथ मिलकर सड़क से लेकर विधानसभा तक जनआंदोलन छेड़ेगी। उन्होंने कहा कि भाषा कोई केवल बोली नहीं, बल्कि अस्मिता और पहचान का हिस्सा है और इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रेस वार्ता में मौजूद थे अन्य वरिष्ठ नेता
इस प्रेस वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अशोक बड़ाईक और युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष शशांक राज भी मौजूद थे। दोनों नेताओं ने भी सरकार की भाषाई नीति की आलोचना की और युवाओं के साथ न्याय की मांग दोहराई।
