Jharkhand News Women Reservation Bill

Ranchi Protest: “आधी आबादी का गुस्सा” BJP नेताओं का IND Alliance पर हमला

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर राष्ट्रीय ख़बर विधानसभा चुनाव

रांची में महिला आरक्षण को लेकर सियासी संग्राम तेज, बीजेपी का विपक्ष पर तीखा हमला

मुख्य बिंदु

  • महिला आरक्षण मुद्दे पर बीजेपी नेताओं का विपक्ष पर बड़ा आरोप
  • रांची की सड़कों पर महिलाओं का प्रदर्शन, राजनीतिक बयानबाजी तेज
  • 33% आरक्षण बिल को लेकर कांग्रेस और इंडी गठबंधन पर निशाना
  • महिला सुरक्षा, प्रतिनिधित्व और अधिकार को लेकर बहस गरम

महिला आरक्षण को लेकर सियासत गरम, बीजेपी ने विपक्ष को घेरा

रांची में महिला आरक्षण के मुद्दे पर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरम हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ खड़े हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गरीब परिवार से आते हैं, इसलिए उन्हें महिलाओं की पीड़ा और संघर्ष का वास्तविक अनुभव है। उनके अनुसार, केंद्र सरकार महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विपक्ष इस दिशा में बाधा बन रहा है।

आदित्य साहू ने यह भी आरोप लगाया कि महिला आरक्षण कानून को रोककर विपक्ष ने “घोर अन्याय” किया है और यह केवल वोट बैंक की राजनीति कर रहा है।

आक्रोश मार्च से गायब… क्या BJP छोड़ने वाली हैं सीता सोरेन?

महिला सुरक्षा और अत्याचार का मुद्दा भी उठा

प्रदेश अध्यक्ष ने झारखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में राज्य में महिलाओं और बच्चियों के साथ गंभीर अपराध सामने आए हैं, लेकिन प्रशासन केवल औपचारिक कार्रवाई कर मामलों को दबाने की कोशिश करता है।

उन्होंने राज्य सरकार पर “मंईयां योजना” के नाम पर दिखावा करने का आरोप लगाया और कहा कि महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

बाबूलाल मरांडी का बड़ा बयान, ‘आधी आबादी के गुस्से से खत्म होगा विपक्ष’

झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पर समर्थन न देना महिलाओं के साथ विश्वासघात है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा महिलाओं की 33% भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष सत्र बुलाया गया था, लेकिन कांग्रेस और झामुमो ने इसका विरोध किया।

मरांडी के अनुसार, इस मुद्दे को लेकर महिलाओं में भारी आक्रोश है, जो सड़कों पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विपक्ष ने समय रहते अपनी सोच नहीं बदली तो “आधी आबादी का गुस्सा” उन्हें राजनीतिक रूप से खत्म कर सकता है।

90% Voting in Bengal: जयराम महतो का दांव चलेगा या सिस्टम जीतेगा?

संजय सेठ का आरोप: ‘मातृशक्ति के साथ हुआ महापाप’

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने भी विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक को समर्थन न देकर विपक्ष ने “मातृशक्ति के साथ महापाप” किया है।

उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक महिलाओं को सत्ता में उचित भागीदारी नहीं मिलेगी, तब तक देश का विकास अधूरा रहेगा।

सम्मानित महिलाओं का भी कांग्रेस पर हमला

पद्मश्री सम्मानित छुटनी महतो और जमुना टुडू ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने के बावजूद महिलाओं के अधिकारों के लिए ठोस काम नहीं किया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि जब महिला आरक्षण लागू करने की कोशिश हुई, तब विपक्ष ने इसका विरोध किया। साथ ही उन्होंने कहा कि महिलाएं अब अपने अधिकार लेने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

‘अब गुहार नहीं, उलगुलान होगा’: रोशनी खलखो

रांची की महापौर रोशनी खलखो ने कहा कि विपक्ष के रवैये के कारण महिलाएं सड़कों पर उतरने को मजबूर हुई हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं को केवल वोट बैंक समझा है, लेकिन अब महिलाएं जागरूक हो चुकी हैं। उनके शब्दों में, “नारी अबला नहीं, सबला है और अब गुहार नहीं, उलगुलान होगा।”

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी

इस पूरे कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली, जिससे यह स्पष्ट है कि महिला आरक्षण का मुद्दा जमीनी स्तर पर भी व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है।

कार्यक्रम का संचालन पूर्व सांसद गीता कोड़ा और सीमा सिंह ने किया। वहीं, कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास, अर्जुन मुंडा सहित कई प्रमुख चेहरे मौजूद रहे।

राजनीतिक संदेश साफ: महिला वोट बैंक पर फोकस

रांची में हुए इस कार्यक्रम और नेताओं के बयानों से साफ संकेत मिलता है कि आगामी चुनावों को देखते हुए महिला वोट बैंक पर सभी राजनीतिक दलों की नजर है।

महिला आरक्षण, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे मुद्दे अब केवल नीति तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि यह चुनावी राजनीति के केंद्र में आ चुके हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह मुद्दा किस तरह राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *