राज्यसभा चुनाव में नया विवाद: रांची पहुंचे सलमान खुर्शीद, बोले- समय रहते पहुंचा लेकिन बंद मिला दरवाजा
रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस की ओर से आपत्तियों पर कानूनी बहस में शामिल होने के लिए सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद विशेष विमान से रांची पहुंचे। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि निर्धारित समय से पहले ही बहस कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया, जिससे उन्हें अपनी दलील रखने का अवसर नहीं मिला।
प्रमुख बातें
- परिमल नाथवानी के नामांकन को लेकर कांग्रेस की आपत्ति
- सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद रांची पहुंचे
- खुर्शीद ने समय से पहले कक्ष बंद किए जाने का लगाया आरोप
- कांग्रेस ने नामांकन पत्र और एफिडेविट में त्रुटियों का दावा किया
- मामले की कानूनी समीक्षा जारी, निर्वाचन आयोग से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
“मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला” : सलमान खुर्शीद
झारखंड विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए सलमान खुर्शीद ने कहा कि निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा दोपहर 1 बजे तक बहस के लिए समय निर्धारित किया गया था। उन्होंने बताया कि वह लगभग 12:30 बजे विधानसभा परिसर पहुंच गए थे, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही संबंधित कक्ष का दरवाजा बंद कर दिया गया।
उन्होंने कहा कि इस कारण वह अपनी दलील प्रस्तुत नहीं कर सके, जिसका उन्हें खेद है। साथ ही उन्होंने कहा कि मामले की कानूनी बारीकियों पर उनके सहयोगी अधिवक्ता सुरेंद्र पाल सिंह अधिक विस्तार से जानकारी देंगे, क्योंकि वे शुरुआत से इस पूरे मामले की पैरवी कर रहे हैं।
कांग्रेस ने नामांकन पत्र में त्रुटियों का लगाया आरोप
कांग्रेस की ओर से अधिवक्ता सुरेंद्र पाल सिंह ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव के लिए कुल तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। गठबंधन समर्थित दोनों उम्मीदवारों के नामांकन स्वीकार कर लिए गए, जबकि निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र में कई कथित त्रुटियां और विसंगतियां मौजूद थीं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नाथवानी द्वारा दाखिल शपथ पत्र (एफिडेविट) में सभी आवश्यक और सटीक जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गई थीं, जिसके कारण प्रारंभिक स्तर पर उनके नामांकन पर सवाल खड़े हुए थे।
निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष रखे गए थे आपत्ति के बिंदु
सुरेंद्र पाल सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने नामांकन से जुड़ी कमियों और तथ्यों को निर्वाचन पदाधिकारी के समक्ष विस्तार से प्रस्तुत किया था। इसके बावजूद बाद में नामांकन स्वीकार कर लिया गया, जिसे उन्होंने चुनावी प्रक्रिया और नियमों की मूल भावना के विपरीत बताया।
उन्होंने कहा कि नामांकन से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर पार्टी की ओर से औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई गई है और पूरे मामले का कानूनी परीक्षण किया जा रहा है।
निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की मांग
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। उनका आरोप है कि यदि किसी उम्मीदवार को नियमों से परे जाकर राहत दी जाती है, तो इससे चुनाव की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठते हैं।
पार्टी ने निर्वाचन आयोग से मामले में पारदर्शी, निष्पक्ष और नियमों के अनुरूप निर्णय लेने की मांग की है। वहीं राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक तथा कानूनी चर्चा का विषय बन सकता है।
