वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर से मुलाकात कर झूम उठे वित्त रहित शिक्षक, अनुदान बढ़ोतरी पर मिली सहमति
पलामू प्रमंडल के शिक्षकों ने मिठाई खिलाकर जताया आभार | लंबे समय से अटकी मांग को मिली सकारात्मक दिशा
रांची/पलामू। झारखंड के वित्त रहित शिक्षकों के लिए रविवार का दिन एक बड़ी राहत और उम्मीद लेकर आया। राज्य के वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर से पलामू प्रमंडल के वित्त रहित शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की और उन्हें बुके भेंट कर मिठाई खिलाई। यह खुशी इसलिए भी विशेष थी क्योंकि शिक्षकों की वर्षों पुरानी मांग — अनुदान बढ़ोतरी की संचिका पर मंत्री की सहमति मिल गई है।

मंत्री से हुई इस मुलाकात में शिक्षकों ने ना केवल अपनी समस्याएं साझा कीं, बल्कि यह विश्वास भी जताया कि जल्द ही उनकी वर्षों की अनदेखी समाप्त होगी। शिक्षकों ने मंत्री के निर्णय को एक “ऐतिहासिक पहल” बताते हुए कहा कि इससे हजारों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक संबल मिलेगा।
वर्षों से संघर्षरत हैं वित्त रहित शिक्षक, अब उम्मीदें जगीं
वित्त रहित शिक्षक लंबे समय से सरकार से मान्यता, नियमित वेतनमान, और पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं जिन्होंने 20 से 30 वर्षों तक सेवा दी है, लेकिन उन्हें ना तो राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त हुई और ना ही वेतन की गारंटी।
राज्य में सैंकड़ों वित्त रहित सैक्षणिक संस्थान हैं, जिनमें हजारों शिक्षक कार्यरत हैं। इन शिक्षकों को मात्र छात्र संख्या के आधार पर नगण्य मानदेय मिलता है, जिससे उनका जीवन यापन बेहद कठिन होता जा रहा है।

इनमें से अधिकांश स्कूल झारखंड के ग्रामीण, आदिवासी और पिछड़े इलाकों में स्थित हैं, जहां शिक्षक ही शिक्षा का एकमात्र आधार हैं। कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापक से लेकर क्लर्क तक की जिम्मेदारी एक ही व्यक्ति निभा रहा है। इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से कोई स्थायी नीति अब तक नहीं लाई गई थी।
मंत्री की सहमति से शिक्षकों में लौट रही है ऊर्जा
फिलहाल यह सहमति अनुदान बढ़ोतरी से संबंधित संचिका पर है, लेकिन इससे यह संकेत स्पष्ट हो रहा है कि सरकार अब इस विषय को गंभीरता से ले रही है।

वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने भी संवाद में यह आश्वासन दिया कि वे शिक्षक समुदाय की भावनाओं को समझते हैं और इस मुद्दे पर यथाशीघ्र कैबिनेट स्तर पर विचार किया जाएगा।
शिक्षकों ने कहा कि वे अब सरकार से स्थायी नीति और नियमितीकरण की स्पष्ट रूपरेखा की मांग करेंगे ताकि उन्हें भी राज्य कर्मचारी का दर्जा मिल सके। साथ ही, उन्होंने आशा जताई कि सरकार सिर्फ सहमति तक सीमित न रहकर इसे जल्द धरातल पर उतारेगी।
सरकार की अगली परीक्षा: सिर्फ आश्वासन नहीं, अमल ज़रूरी
राज्य में शिक्षा की नींव को मजबूत बनाने के लिए सरकार को उन शिक्षकों की ओर गंभीरता से देखना होगा जो दशकों से बिना वेतन, बिना मान्यता के बच्चों को शिक्षित करने में जुटे हैं।
अगर सरकार वाकई शिक्षकों की मेहनत को सम्मान देना चाहती है तो वित्त मंत्री की सहमति को एक ठोस निर्णय में तब्दील करना अनिवार्य है। झारखंड शिक्षा विभाग की ओर से भी अब इस दिशा में पहल की प्रतीक्षा है।
