मुख्य बिंदु:
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मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विश्व आदिवासी दिवस पर अपने गुरु और आदिवासी समाज के वीर पुरखों को नमन किया
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उन्होंने आदिवासी संस्कृति, संघर्ष और अधिकारों की महत्ता पर जोर दिया
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आदिवासी समाज को प्रकृति के साथ सामंजस्य और खुशहाल जीवन का मार्गदर्शक बताया
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मुख्यमंत्री ने आदिवासी अस्मिता को ऊंचा करने का संकल्प लिया
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पूरे राज्य में विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन आदिवासी संस्कृति को समर्पित
विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का भावुक संदेश: “मेरे गुरु, मेरे बाबा सशरीर साथ नहीं, पर आदर्श प्रेरणा बनकर सदैव हैं”
रांची, 9 अगस्त 2025– विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक गहरा और प्रेरणादायक संदेश साझा किया। उन्होंने अपने गुरु, मार्गदर्शक और पिता दिशोम गुरु को याद करते हुए कहा कि भले ही वे सशरीर साथ न हों, उनका संघर्ष, विचार और आदर्श हमेशा आदिवासी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

आदिवासी समाज का जीवन-दर्शन और संघर्ष की कहानी
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज को प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाए रखने वाला समाज बताया, जिसने मानवता को खुशहाल जीवन का मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि आदिवासी जीवन दर्शन प्रकृति से जुड़ा हुआ है और सदियों से इस समाज को शोषण और हाशिए पर रखा गया है। इसी सामाजिक अन्याय को खत्म करने के लिए उनके गुरु ने अपना समर्पित जीवन न्यौछावर कर दिया।
विश्व आदिवासी दिवस का सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व
हेमंत सोरेन ने बताया कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी सभ्यता और संस्कृति को एकजुट करने, उनकी प्रतिभा को वैश्विक मंच पर लाने का अवसर है। राज्य भर में इस दिन विशेष आयोजन होते हैं, जो आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत को उजागर करते हैं।
आदिवासी अस्मिता को ऊंचा करने का संकल्प
अपने संदेश में मुख्यमंत्री ने आदिवासी पुरखों को नमन करते हुए यह संकल्प व्यक्त किया कि वे उनके दिखाए मार्ग पर चलकर झारखंड और पूरे देश में आदिवासी अस्मिता की मशाल को और ऊंचा करेंगे। उन्होंने आदिवासी योद्धाओं की अमरता की कामना करते हुए जय जोहार, जय आदिवासियत और जय झारखंड का उद्घोष किया।
