🌿 पर्यावरण सप्ताह पर रांची में आध्यात्मिक पहल: ब्रह्माकुमारीज ने दिया जागरूकता का संदेश
🔷 प्रमुख बातें:
-
झारखंड के पीसीसीएफ अशोक कुमार ने कहा – “प्रकृति का दुरुपयोग मानव को करता है दंडित”
-
रांची विश्वविद्यालय के शिक्षकों ने वैचारिक प्रदूषण पर चिंता जताई
-
ब्रह्माकुमारीज ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पर्यावरण सुधार का मंत्र दिया
-
ध्यान और आत्मिक स्थिति को बताया गया पर्यावरणीय स्वास्थ्य का आधार
-
कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद् और समाजसेवियों ने की भागीदारी
🌎 आध्यात्मिक दृष्टिकोण से पर्यावरण रक्षा की अपील
रांची के हरमू रोड स्थित ब्रह्माकुमारीज चौधरी बगान केंद्र में पर्यावरण दिवस सप्ताह के अंतर्गत एक विचारोत्तेजक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य लोगों को न केवल पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना था, बल्कि आध्यात्मिक दृष्टिकोण से प्रकृति से जुड़ने का संदेश भी देना था।
कार्यक्रम में झारखंड के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अशोक कुमार ने कहा कि प्रकृति के नियम भले ही लचीले हों, लेकिन जब मानव उसके अनुशासन को तोड़ता है तो उसे दंड अवश्य मिलता है। उन्होंने इस अवसर पर पर्यावरण और मानव आचरण के बीच के संबंध को स्पष्ट किया।

🧘 ध्यान और आंतरिक शुद्धता से संभव है पर्यावरण संतुलन
इस अवसर पर रांची विश्वविद्यालय छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष (डीन) प्रो. सुधेश साहू ने कहा कि हमें प्रकृति का शोषण नहीं, बल्कि संरक्षण करना चाहिए। उन्होंने चेताया कि यदि हमने अपने आचरण में बदलाव नहीं किया तो भविष्य संकट में पड़ सकता है। साथ ही उन्होंने युवाओं को पर्यावरणीय नेतृत्व की भूमिका निभाने की भी सलाह दी।
रांची विश्वविद्यालय के गृह विज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. किरण कुमारी ने कहा कि मानव और प्रकृति की एकता ही विश्व को बचा सकती है। उन्होंने वैचारिक प्रदूषण को पर्यावरणीय संकट का जड़ बताया और ब्रह्माकुमारीज के प्रयासों की सराहना की।

🔄 आध्यात्मिक साधना से होगा सकारात्मक बदलाव
नाबार्ड के पूर्व उपमहाप्रबंधक सुबाष चंद्र गर्ग ने कहा कि वर्तमान दूषित वातावरण को केवल आध्यात्मिक साधना से बदला जा सकता है। उन्होंने कहा, “जब व्यक्ति परम पुरुष से योग जोड़ता है, तो उसका वातावरण स्वतः बदलता है और समाज में श्रेष्ठता का संचार होता है।”
वहीं समाजसेवी मनोहर केडिया ने कहा कि अब समय आ गया है कि हम अपनी चेतना का निर्माण करें। उन्होंने विचारशील समाज की आवश्यकता पर बल दिया और इसे नवनिर्माण की दिशा में पहला कदम बताया।
🩺 “स्व + स्थिति” को बताया गया सच्चा स्वास्थ्य
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता ब्रह्माकुमारी निर्मला बहन ने पर्यावरण और स्वास्थ्य के बीच के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि “स्व+स्थिति” ही सच्चे स्वास्थ्य की पहचान है। उन्होंने बताया कि जब मनुष्य आत्मिक स्थिति में स्थित होता है तो उसे सात आध्यात्मिक गुणों – ज्ञान, पवित्रता, शांति, प्रेम, सुख, आनंद और शक्ति – की अनुभूति होती है।
उन्होंने यह भी बताया कि ये सात गुण शरीर के विभिन्न अंगों को पोषण देते हैं – जैसे ज्ञान मस्तिष्क को, पवित्रता त्वचा को, शांति फेफड़ों को, प्रेम हृदय को, सुख आंतों को, आनंद हार्मोन्स को और शक्ति हड्डियों को। उन्होंने मेडिटेशन को मानसिक प्रदूषण से मुक्ति का सबसे प्रभावी उपाय बताया।
