झारखंड की पहचान को वैश्विक मंच तक ले जाने का मौका, अंतरराष्ट्रीय एक्सपो से सीख सकता है राज्य; खनिज, माइंस, पर्यटन, कला-संस्कृति बन सकती है बड़ी ताकत
रांची। झारखंड को देश और दुनिया के सामने केवल खनिज संपदा वाले राज्य के रूप में नहीं, बल्कि उद्योग, ऊर्जा, पर्यटन, आदिवासी कला-संस्कृति और स्थानीय उत्पादों की व्यापक संभावनाओं वाले राज्य के रूप में स्थापित करने की जरूरत है। इसके लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले बिजनेस और इंडस्ट्री एक्सपो झारखंड के लिए महत्वपूर्ण मंच साबित हो सकते हैं। ऐसे आयोजनों में दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले कारोबारी, निवेशक, तकनीकी विशेषज्ञ, सरकारी प्रतिनिधि और उद्योग जगत से जुड़े लोग एक जगह जुटते हैं। ऐसे में झारखंड यदि अपनी क्षमता को योजनाबद्ध तरीके से इन मंचों पर प्रस्तुत करे तो राज्य की पहचान और कारोबार दोनों को विस्तार मिल सकता है।

इसी संदर्भ में Philippine Solar & Power Expo से संबंधित पोस्ट शो रिपोर्ट और 2026 के ब्रोशर में दर्ज जानकारी महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट के अनुसार यह आयोजन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और इलेक्ट्रिकल सेक्टर से जुड़ा अंतरराष्ट्रीय मंच है। ब्रोशर में 24-25 सितंबर 2026 को मनीला के SMX Convention Centre में इसके दूसरे संस्करण के आयोजन का उल्लेख किया गया है।
100 से ज्यादा प्रदर्शक, 2500 से ज्यादा विजिटर और 10 से अधिक देशों की भागीदारी
रिपोर्ट में पिछले आयोजन के अनुभव और 2026 के एक्सपो की जानकारी देते हुए बताया गया है कि इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर 100 से अधिक प्रदर्शक, 2500 से अधिक विजिटर और 10 से अधिक देशों की भागीदारी रही। इसमें भारत, फिलीपींस, फ्रांस, मलेशिया, चीन, यूएई, वियतनाम और दक्षिण कोरिया सहित विभिन्न देशों की भागीदारी दिखाई गई है।
यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि किसी राज्य या क्षेत्र के कारोबारी और औद्योगिक अवसरों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के लोगों तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजन एक साझा मंच उपलब्ध कराते हैं।

रिपोर्ट में एक्सपो को सोलर, पावर और एनर्जी सेक्टर से जुड़े निर्माताओं, एक्सपोर्टर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, पार्टनर्स, ट्रेडर्स, कॉन्ट्रैक्टर्स, डेवलपर्स, आर्किटेक्ट्स, इंजीनियर्स और अन्य पेशेवरों को एक साथ लाने वाला मंच बताया गया है।
सिर्फ प्रदर्शनी नहीं, कारोबार और संपर्क का भी मंच
ऐसे एक्सपो की खासियत सिर्फ यह नहीं है कि कंपनियां अपने उत्पादों का प्रदर्शन करती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक यहां आने वाले लोगों के प्रमुख उद्देश्यों में नए उत्पाद, निर्माता और सप्लायर तलाशना, नई तकनीक की जानकारी हासिल करना, उद्योग से जुड़े लोगों से मुलाकात करना, उत्पादों की तुलना करना और संभावित ऑर्डर की संभावना तलाशना शामिल है।

यही मॉडल झारखंड के लिए भी उपयोगी हो सकता है।
राज्य में खनिज संपदा और माइंस के साथ-साथ खनिज आधारित उद्योगों की बड़ी संभावनाएं हैं। यदि झारखंड के उद्योग, MSME, स्टार्टअप और स्थानीय उत्पादों को ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जगह मिले तो राज्य के उद्यमियों को नए बाजारों और कारोबारी संपर्कों तक पहुंच बनाने का अवसर मिल सकता है।
झारखंड के लिए सोलर और पावर सेक्टर में भी अवसर
फिलीपींस एक्सपो की प्रदर्शक सूची पर नजर डालें तो इसमें सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी, लाइटिंग, वायर एवं केबल, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, पावर इक्विपमेंट, रिन्यूएबल एनर्जी, हाइड्रो पावर, HVAC, ऊर्जा दक्षता, विंड पावर, ऑटोमेशन और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स जैसे अनेक क्षेत्र शामिल हैं।
झारखंड के संदर्भ में इसका महत्व और बढ़ जाता है। राज्य में उद्योग और ऊर्जा की जरूरत के साथ-साथ नई ऊर्जा, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, सौर ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता के क्षेत्र में भी स्थानीय कंपनियों और उद्यमियों के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं।

झारखंड का अपना ‘Jharkhand Pavilion’ क्यों नहीं?
झारखंड सरकार और राज्य के उद्योग एवं पर्यटन से जुड़े संस्थानों को इस दिशा में विचार करना चाहिए कि देश-विदेश में आयोजित होने वाले ऐसे बड़े एक्सपो में “Jharkhand Pavilion” स्थापित किया जाए।
इस पवेलियन में झारखंड को एक पैकेज के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
एक तरफ खनिज और माइंस, दूसरी तरफ ऊर्जा और उद्योग।
एक तरफ पर्यटन, दूसरी तरफ आदिवासी कला और संस्कृति।
एक तरफ हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद, दूसरी तरफ राज्य के नए उद्यम और MSME।
यानी झारखंड की पूरी तस्वीर एक ही मंच पर दुनिया के सामने रखी जा सकती है।
सिर्फ माइंस नहीं, झारखंड की पूरी कहानी दुनिया को बताने की जरूरत
झारखंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान अक्सर खनिज और खनन से जुड़कर रह जाती है। लेकिन राज्य की कहानी इससे काफी बड़ी है।
झारखंड के पास प्राकृतिक पर्यटन, जंगल, जलप्रपात, पहाड़, आदिवासी जीवनशैली, लोककला, संगीत, नृत्य, हस्तशिल्प और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है। इन क्षेत्रों में काम करने वाले स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और छोटे उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय मंच उपलब्ध कराया जाए तो उन्हें नए ग्राहक और बाजार मिल सकते हैं।
इसी तरह राज्य के पर्यटन स्थलों की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग भी की जा सकती है। एक अंतरराष्ट्रीय एक्सपो में झारखंड के पर्यटन स्थलों की आकर्षक तस्वीरें, वीडियो और डिजिटल प्रेजेंटेशन प्रदर्शित किए जाएं तो देश के बाहर से आने वाले लोगों का ध्यान राज्य की ओर आकर्षित किया जा सकता है।
स्थानीय उत्पादों को ग्लोबल मार्केट से जोड़ने का अवसर
अंतरराष्ट्रीय एक्सपो में सिर्फ बड़ी कंपनियों को ही नहीं, बल्कि स्थानीय और छोटे उद्यमियों को भी अवसर मिल सकता है। रिपोर्ट में विजिटर्स की प्रोफाइल में प्रोजेक्ट डायरेक्टर, मैनेजर, डीलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स, सरकारी विभाग, इंजीनियर, कंसल्टेंट और विभिन्न उद्योगों से जुड़े पेशेवरों का उल्लेख किया गया है।
ऐसे लोगों के सामने यदि झारखंड के हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद, खाद्य उत्पाद, औद्योगिक उत्पाद और अन्य संभावनाओं को पेश किया जाए तो राज्य के कारोबारियों को नए संपर्क बनाने का मौका मिल सकता है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया कवरेज भी बन सकता है बड़ा माध्यम
फिलीपींस एक्सपो की रिपोर्ट में आयोजन से जुड़ी मीडिया कवरेज भी दिखाई गई है। विभिन्न मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक्सपो की खबरें और प्रचार सामग्री प्रकाशित होने का उल्लेख रिपोर्ट में मौजूद है।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि किसी अंतरराष्ट्रीय आयोजन में भागीदारी केवल वहां मौजूद लोगों तक सीमित नहीं रहती। यदि सही रणनीति बनाई जाए तो मीडिया कवरेज के जरिए किसी राज्य या क्षेत्र की पहचान और भी व्यापक दर्शकों तक पहुंचाई जा सकती है।
News Monitor की भी यही कोशिश
News Monitor झारखंड की पहचान को देश और दुनिया में स्थापित करने की दिशा में काम कर रहा है। हमारा प्रयास सिर्फ राज्य की राजनीतिक और स्थानीय खबरों तक सीमित नहीं है, बल्कि झारखंड की क्षमता, संभावनाओं, पर्यटन, उद्योग, रोजगार, कला, संस्कृति और जनसरोकार से जुड़े विषयों को भी व्यापक मंच तक पहुंचाना है।
हमारा मानना है कि झारखंड की कहानी सिर्फ झारखंड में नहीं सुनाई जानी चाहिए। झारखंड के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है और दुनिया को झारखंड के बारे में जानने का अवसर मिलना चाहिए।
इसके लिए मीडिया अपनी भूमिका निभा सकता है, लेकिन सरकार, उद्योग जगत, पर्यटन विभाग, स्थानीय उद्यमी, कलाकार और कारोबारी भी मिलकर अंतरराष्ट्रीय मंचों का इस्तेमाल करें तो इसका प्रभाव कहीं व्यापक हो सकता है।
झारखंड को अपनी ब्रांडिंग की रणनीति बनाने की जरूरत
फिलीपींस सोलर एंड पावर एक्सपो का उदाहरण यह दिखाता है कि किस तरह एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन में विभिन्न देशों के उद्योग, कारोबारी, तकनीकी विशेषज्ञ और संभावित खरीदार एक साथ आते हैं। रिपोर्ट में एक्सपो को नए बाजारों, तकनीक, उत्पादों और कारोबारी संपर्कों के अवसर से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।
झारखंड भी अपनी जरूरत और ताकत के मुताबिक ऐसी रणनीति तैयार कर सकता है। खनिज से लेकर माइंस तक, उद्योग से लेकर ऊर्जा तक, पर्यटन से लेकर कला-संस्कृति तक और स्थानीय उत्पादों से लेकर नए उद्यमों तक—झारखंड की पूरी क्षमता को एक ब्रांड के रूप में दुनिया के सामने रखने की जरूरत है।
ऐसे प्रयासों से राज्य को केवल निवेश और कारोबार के नए अवसर ही नहीं मिल सकते, बल्कि झारखंड की अंतरराष्ट्रीय पहचान को भी एक नई दिशा मिल सकती है।
