एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में साइबरपीस फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स कार्यक्रम का आयोजन
मुख्य बिंदु:
साइबरपीस फाउंडेशन और Google.org के सहयोग से हुआ आयोजन
ऑनलाइन सुरक्षा, पहचान की चोरी और डीपफेक जैसे मुद्दों पर हुई चर्चा
विद्यार्थियों को साइबर खतरों से निपटने के लिए किया गया प्रशिक्षित
मास्क्ड आधार कार्ड, फ़िशिंग, स्पाइवेयर और रैनसमवेयर से बचाव के उपाय बताए गए
ऑन-कैंपस साइबर सुरक्षा जागरूकता की पहल
रांची स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में 24 जुलाई 2025 को एक विशेष साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम एमिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी द्वारा साइबरपीस फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने और उन्हें प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता के रूप में तैयार करने का था।

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कुलपति ने दी शुभकामनाएं
कार्यक्रम की शुरुआत में एमिटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. अशोक के. श्रीवास्तव ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम विद्यार्थियों को डिजिटल युग की चुनौतियों से लड़ने के लिए सक्षम बनाते हैं। उन्होंने इसे विश्वविद्यालय के विजन और मिशन के अनुरूप बताया।
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साइबरपीस फाउंडेशन और Google.org की साझेदारी
कार्यक्रम में बताया गया कि साइबरपीस फाउंडेशन ने Google.org के साथ मिलकर “साइबरपीस फर्स्ट रिस्पॉन्डर्स प्रोग्राम” की पहल की है। इस कार्यक्रम का मकसद है युवाओं को ऑनलाइन गलत सूचना, फिशिंग अटैक, पहचान की चोरी, रैनसमवेयर और डीपफेक जैसी साइबर चुनौतियों के प्रति सजग करना।

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शुभांगी शिफा ने साझा किए डिजिटल सुरक्षा के उपाय
साइबरपीस फाउंडेशन की सहायक प्रबंधक सुश्री शुभांगी शिफा ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने विद्यार्थियों को ऑनलाइन सुरक्षित रहने के व्यवहारिक उपाय बताए। खासतौर पर उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:
मास्क्ड आधार कार्ड के माध्यम से पहचान की चोरी से बचाव
गलत सूचना (Misinformation) और भ्रामक सूचना (Disinformation) के प्रकार और बचाव
डीपफेक तकनीक के खतरों और इसके दुष्प्रभाव
बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा, खासकर स्कूल यूनिफॉर्म में तस्वीरें साझा करने से बचाव
साइबर अपराधियों द्वारा नौकरी देने के बहाने युवाओं को गुमराह करने की चालें
प्रतिरूपण, फिशिंग, बैटिंग, स्पाइवेयर, रैनसमवेयर जैसी तकनीकों से साइबर हमला
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साइबर जागरूकता से सशक्त होंगे युवा
शुभांगी शिफा ने यह भी बताया कि कैसे डिजिटल दुनिया में सतर्कता और जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांचें।
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कार्यक्रम में अन्य विशेषज्ञों की भागीदारी
इस अवसर पर साइबरपीस फाउंडेशन के परियोजना समन्वयक श्री सुनील कुजूर भी उपस्थित रहे। उन्होंने छात्रों को साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के पीछे के मनोविज्ञान और सामाजिक पहलुओं के बारे में विस्तार से बताया।
