झारखंड हाई कोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठाए गंभीर सवाल, JSSC से मांगा विस्तृत जवाब
रांची | 4 अगस्त 2026
मुख्य बातें
- झारखंड हाई कोर्ट ने JSSC की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए।
- समान रॉ अंक वाले अभ्यर्थियों के अलग-अलग नॉर्मलाइज्ड स्कोर पर कोर्ट ने मांगा जवाब।
- अलग-अलग रॉ अंक के बावजूद समान अंतिम स्कोर कैसे बना, इस पर भी स्पष्टीकरण तलब।
- JSSC को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश।
- मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।
झारखंड हाई कोर्ट ने सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-13/2023) में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने आयोग से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगते हुए कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
समान रॉ अंक पर अलग-अलग नॉर्मलाइज्ड स्कोर पर कोर्ट की टिप्पणी
यह मामला गिरिधर प्रसाद एवं अन्य बनाम राज्य एवं अन्य से संबंधित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकलपीठ के समक्ष आया।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि JSSC द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतरती। इसके समर्थन में एक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया, जिसमें एक ही सिटिंग में परीक्षा देने वाले दो अभ्यर्थियों के रॉ अंक 69-69 होने के बावजूद, एक का नॉर्मलाइज्ड स्कोर 17 और दूसरे का 34 दर्शाया गया।
इसके बाद न्यायालय ने आयोग से पूछा कि समान परिस्थितियों में परीक्षा देने वाले और समान रॉ अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड स्कोर में इतना अंतर किस आधार पर किया गया।
अलग-अलग रॉ अंक के बावजूद समान अंतिम स्कोर पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया। अदालत ने पूछा कि यदि दो अभ्यर्थियों के रॉ अंक अलग-अलग हैं, तो क्या नॉर्मलाइजेशन के बाद उनका अंतिम स्कोर समान हो सकता है।
इसी के साथ न्यायालय ने इन दोनों बिंदुओं पर JSSC को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।
6 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को निर्धारित की गई है। अब सभी की निगाहें JSSC द्वारा अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले स्पष्टीकरण पर टिकी हैं, क्योंकि इस विवाद का असर सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों पर पड़ सकता है।
दोनों पक्षों की ओर से इन अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता शुभम मिश्रा, अमृतांश वत्स, काज़ी आसिफ़ इक़बाल, ज्ञानदेव राज, प्रेम पुजारी राय सहित अन्य अधिवक्ताओं ने पक्ष रखा।
वहीं, JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने आयोग का प्रतिनिधित्व किया।
अभ्यर्थियों की निगाहें अगली सुनवाई पर
फिलहाल, यह मामला सहायक आचार्य नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े हजारों अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि JSSC अपने हलफनामे में नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया को लेकर अदालत के सवालों का क्या जवाब देता है और आगे न्यायालय इस मामले में क्या रुख अपनाता है।
