आदिवासियों की जमीन पर कॉरपोरेट नजर? संताल परगना में उबाल

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दुमका: संताल परगना में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ सीपीआईएम का आर-पार संघर्ष का ऐलान

दुमका/संताल परगना, झारखंड: दुमका और संताल परगना के जनजातीय इलाकों में कथित रूप से कॉरपोरेट–राज्य गठजोड़ के जरिए हो रहे भूमि अधिग्रहण और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने तीव्र आंदोलन छेड़ने की घोषणा की है। पार्टी के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में प्रभावित गांवों का दौरा कर कई गंभीर आरोप लगाए।

प्रतिनिधिमंडल का दौरा और प्रमुख सदस्य

दौरे में राज्य सचिव प्रकाश विप्लव, राज्य सचिव मंडल सदस्य सुरजीत सिन्हा, राज्य कमेटी सदस्य सुभाष हेम्ब्रम और अमल आज़ाद, तथा जिला सचिव देवी सिंह पहाड़िया शामिल थे। टीम ने स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत कर जमीनी हालात का आकलन किया।

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संवैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप

प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, प्रशासन और एमडीओ (MDO) स्थानीय दलालों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण कानूनों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिनमें

  • वनाधिकार अधिनियम (FRA)
  • पेसा अधिनियम (PESA)
  • संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम (SPT Act)

शामिल हैं। आरोप है कि ग्राम सभा की अनुमति के बिना सर्वेक्षण और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिसे पार्टी ने पूरी तरह अवैध बताया।

लंबित दावे और विस्थापन की आशंका

क्षेत्र में वनाधिकार से जुड़े दर्जनों आवेदन वर्षों से लंबित बताए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद, विशेष रूप से PVTG समुदायों के दावों का निपटारा किए बिना विस्थापन की तैयारी की जा रही है।

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ग्राम सभाओं की अनदेखी का आरोप

पार्टी ने आरोप लगाया कि पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को दिए गए अधिकारों को नजरअंदाज किया जा रहा है। ग्रामीणों को कथित रूप से डराने और दबाव बनाने की कोशिशें भी सामने आई हैं।

ग्रामीणों का सामूहिक निर्णय और आगे की रणनीति

1. ग्राम सभा गठन का अल्टीमेटम:
ग्रामीणों ने स्थानीय मुखियाओं को 10 दिनों के भीतर ग्राम सभा बुलाने का अल्टीमेटम दिया है, ताकि वन अधिकार समितियों का गठन और नए दावों का पंजीकरण किया जा सके।

2. दस्तावेजी साक्ष्य तैयार करना:
ग्राम सभाओं के प्रस्तावों को राज्यपाल, राष्ट्रपति और उच्च न्यायालय को भेजा जाएगा।

3. संगठनात्मक ढांचा मजबूत करना:
एक विशेष उपसमिति बनाई गई है, जो ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने और कानूनी लड़ाई की निगरानी करेगी।

4. बड़े आंदोलन की तैयारी:
मई 2026 के तीसरे सप्ताह में दुमका आयुक्त कार्यालय के सामने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की योजना है। इसकी अंतिम रणनीति 10 मई को जिला कमेटी बैठक में तय होगी।

पार्टी नेतृत्व की चेतावनी

पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कहा कि आदिवासियों को उनकी पैतृक भूमि से बेदखल करने की किसी भी कोशिश का कड़ा प्रतिरोध किया जाएगा। बयान में इसे “अस्तित्व की लड़ाई” बताते हुए कहा गया कि जब तक अंतिम व्यक्ति का वनाधिकार सुरक्षित नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

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