पेसा नियमावली पर चम्पाई सोरेन का तंज, हेमंत सरकार पर साधा निशाना
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन का दर्द एक बार फिर सार्वजनिक मंच पर सामने आया है। पेसा नियमावली को लेकर उन्होंने राज्य की हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला और अपने अल्पकालिक मुख्यमंत्री कार्यकाल का जिक्र करते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज़ में अपनी पीड़ा साझा की।
चम्पाई सोरेन ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री के तौर पर काम करने का मौका ठीक उसी तरह मिला, जैसे किसी सिनेमा हॉल में फिल्म के दौरान इंटरवल का समय मिलता है। उन्होंने हंसते हुए कहा कि “इंटरवल में जैसे बिस्किट और आधी चाय पीने का मौका मिलता है, वैसे ही मुझे मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का अवसर मिला।” हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कम समय के बावजूद उनका कार्यकाल प्रभावशाली रहा।
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनका छोटा सा मुख्यमंत्री काल, हेमंत सोरेन सरकार के पूरे कार्यकाल पर भारी है। उन्होंने इशारों-इशारों में कहा कि अवधि भले ही कम रही हो, लेकिन फैसलों और कार्यशैली के लिहाज से उनका योगदान कहीं अधिक असरदार था।
पेसा नियमावली को लेकर चम्पाई सोरेन लगातार हेमंत सरकार की आलोचना करते रहे हैं। उनका आरोप है कि मौजूदा नियमावली आदिवासी हितों और ग्राम सभा की मूल भावना के खिलाफ है। इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने एक बार फिर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि आदिवासी अधिकारों से जुड़े मामलों में किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
चम्पाई सोरेन का यह बयान झारखंड की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है। पेसा नियमावली और आदिवासी अधिकारों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री की टिप्पणी को सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए सियासी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
