अनुदान घोटाले का आरोप या सरकारी लापरवाही? 8000 शिक्षक भूखे, 4 लाख छात्रों की पढ़ाई पर संकट!
“एक तरफ मासिक वेतन, दूसरी तरफ साल में एक बार भी नहीं… क्या सरकार खुद ही बंद करना चाहती है ये स्कूल?”
मुख्य बिंदु
- 523 में से 223 संस्थाओं का अनुदान रोके जाने का आरोप
- 7000–8000 शिक्षक कर्मचारियों ने किया उपवास
- 4 लाख छात्रों की पढ़ाई पर सीधा असर
- 10 अप्रैल को रांची में महा धरना का ऐलान
- “अब आर-पार की लड़ाई” – मोर्चा
अनुदान में ‘दोहरा मापदंड’ का आरोप, जांच की मांग तेज
राज्यभर के वित्त रहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा विद्यालयों के शिक्षक-कर्मचारियों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 523 में से 223 संस्थाओं का अनुदान रोक दिया गया, जो साफ तौर पर “दोहरा मापदंड” दर्शाता है।
इसी मुद्दे को लेकर शिक्षक-कर्मचारियों ने उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए राज्यव्यापी विरोध तेज कर दिया है।
उपवास पर शिक्षक, फिर भी जारी रखा पढ़ाना
करीब 7000 से 8000 शिक्षक-कर्मचारियों ने उपवास पर रहते हुए भी पठन-पाठन जारी रखा, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि वे अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटना चाहते।
लेकिन उनका दर्द साफ झलकता है—
“हम साल में एक बार मिलने वाले अनुदान पर निर्भर हैं, उसी से 4 लाख बच्चों की पढ़ाई चलती है।”
सरकारी बनाम वित्त रहित स्कूल: बड़ा असमानता का सवाल
शिक्षकों ने सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा किया है—
- सरकारी स्कूलों में मासिक वेतन
- वित्त रहित संस्थानों में साल में एक बार अनुदान भी अनिश्चित
उनका कहना है कि अब तो सालाना अनुदान भी ‘साजिश’ के तहत काटा जा रहा है, जिससे हालात बदतर हो गए हैं।
“अगर बंद करना है तो आदेश जारी करें” – शिक्षकों की चेतावनी
मोर्चा ने साफ कहा है—
“अगर सरकार चाहती है कि ये संस्थान बंद हो जाएं, तो सीधा आदेश जारी करे।”
हर साल बिना कारण अनुदान रोकने को उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ सुनियोजित कार्रवाई बताया है।
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भुखमरी की कगार पर शिक्षक, मार्च का इंतजार भी टूटा
शिक्षकों को उम्मीद थी कि मार्च में अनुदान मिलेगा, लेकिन वह भी नहीं मिला।
अब स्थिति यह है कि—
“शिक्षक-कर्मचारी भुखमरी के कगार पर हैं।”
ऑनलाइन प्रक्रिया और देरी से और बढ़ेगी परेशानी
मोर्चा ने बताया कि—
- अपील की प्रक्रिया फिर से शुरू होगी
- 31 मई तक आवेदन
- इसके बाद जांच और लंबी प्रक्रिया
- अनुदान मिलते-मिलते अक्टूबर-नवंबर तक देरी
यानी, पूरे साल आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा।
अब सड़क पर संघर्ष! 10 अप्रैल को महा धरना
शिक्षकों ने ऐलान कर दिया है—
“अब भूखे मरने से बेहतर है सड़क पर संघर्ष करना।”
10 अप्रैल 2026 को रांची के लोक भवन के सामने महा धरना होगा।
इसके बाद राज्यपाल से उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी।
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7 अप्रैल को काला बिल्ला लगाकर विरोध
मोर्चा ने 7 अप्रैल को पूरे राज्य में—
काला बिल्ला लगाकर पठन-पाठन के साथ विरोध दर्ज कराने का फैसला लिया है।
नेताओं का हमला: “अब आर-पार की लड़ाई”
मोर्चा के नेताओं—
रघुनाथ सिंह, फजलुल कदीर अहमद, गणेश महतो, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, चंदेश्वर पाठक सहित कई नेताओं ने कहा—
“अगर उच्च स्तरीय जांच नहीं हुई, तो हम अपीलीय आवेदन भी नहीं भरेंगे।”
उन्होंने शिक्षा सचिव पर भी गंभीर आरोप लगाए कि—
“बार-बार ध्यान दिलाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही।”
राज्यभर के शिक्षकों को आंदोलन में शामिल होने का आह्वान
मोर्चा ने सभी जिलों के शिक्षक-कर्मचारियों को 10 अप्रैल को रांची पहुंचने का आह्वान किया है।
साफ संकेत है कि यह आंदोलन अब और बड़ा रूप लेने वाला है।
निष्कर्ष: शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा संकट
यह मामला सिर्फ शिक्षकों की मांग नहीं, बल्कि 4 लाख छात्रों के भविष्य का सवाल बन चुका है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।
