भाजपा की राजनीति हमेशा आदिवासी, मुस्लिम और OBC विरोधी रही- कैलाश यादव.

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

राजद प्रवक्ता कैलाश यादव का हमला: “भाजपा की राजनीति सदैव आदिवासी, मुस्लिम और ओबीसी विरोधी रही है”

मुख्य बिंदु:

  • राजद प्रदेश महासचिव कैलाश यादव ने भाजपा पर लगाया समुदाय विरोधी राजनीति का आरोप

  • बाबूलाल मरांडी, चंपई सोरेन, निशिकांत दुबे जैसे नेताओं की बयानबाजी को बताया जनविरोधी

  • राज्य सरकार को नगर निकाय चुनाव शीघ्र कराने का सुझाव

  • कहा—जनप्रतिनिधियों के ज़रिए योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचेगा



भाजपा की राजनीति पर सीधा हमला: “नहीं दिखती आदिवासी-मिशनरी-मुस्लिम हितों की गंभीरता”

रांची- 31 मई 2025- झारखंड प्रदेश राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के महासचिव सह मीडिया प्रभारी कैलाश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति ऐतिहासिक रूप से मुस्लिम, मिशन, आदिवासी और पिछड़ा वर्ग (OBC) विरोधी रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा ने हमेशा समाज के संवेदनशील वर्गों के हितों की अनदेखी की है।

बाबूलाल, चंपई और निशिकांत पर साधा निशाना

कैलाश यादव ने साफ कहा कि जब से झारखंड में हेमंत सोरेन के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी है, भाजपा नेताओं—खासकर बाबूलाल मरांडी, चंपई सोरेन और निशिकांत दुबे—ने लगातार जनविरोधी और विभाजनकारी बयान दिए हैं।

उन्होंने कहा कि पेशा कानून, सरना धर्म कोड, जातीय जनगणना, और आरक्षण की सीमा बढ़ाने जैसे गंभीर विषयों पर भाजपा नेताओं ने कोई संवेदनशीलता नहीं दिखाई। इसके बजाय वे केवल राजनीतिक शिष्टाचार निभाते हुए कटाक्ष और बयानबाजी तक सीमित रहे हैं।



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झारखंड सरकार को नगर निकाय चुनाव कराने का सुझाव

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कैलाश यादव ने झारखंड सरकार को नगर निकाय चुनाव अविलंब कराने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि स्थानीय चुनावों में हो रही देरी से विकास की रफ्तार प्रभावित हो रही है

उनका मानना है कि अगर चुनाव जल्द कराए जाएं, तो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सरकारी योजनाओं का लाभ क्षेत्रवार अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा, जिससे प्रशासनिक प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित होंगे।

जनहित की राजनीति बनाम कटाक्ष की राजनीति

यादव ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि भाजपा केवल राजनीतिक कटाक्ष और बयानबाज़ी में लिप्त रहती है, जबकि झारखंड की जनता अब विकास और समावेशी नीतियों की राजनीति चाहती है। उन्होंने कहा, “राजनीतिक बयान से पेट नहीं भरता—ज़मीन पर काम चाहिए, योजनाओं का लाभ चाहिए।”

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