घाटशिला उपचुनाव: भाजपा ने बाबूलाल सोरेन पर खेला बड़ा दांव, पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बेटे को बनाया उम्मीदवार
मुख्य बिंदु:
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भाजपा ने घाटशिला उपचुनाव के लिए बाबूलाल सोरेन को उम्मीदवार घोषित किया।
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बाबूलाल सोरेन झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के पुत्र हैं।
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इस घोषणा के साथ झारखंड की राजनीति में नया समीकरण बनने लगा है।
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भाजपा का यह निर्णय झामुमो के परंपरागत वोटबैंक में सेंध लगाने की रणनीति माना जा रहा है।
भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने की घोषणा
रांची, 15 अक्टूबर 2025- भारतीय जनता पार्टी ने झारखंड की सियासत में बड़ा दांव खेलते हुए घाटशिला विधानसभा उपचुनाव के लिए बाबूलाल सोरेन को आधिकारिक प्रत्याशी घोषित किया है। भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक में यह फैसला लिया गया, जिसके बाद राज्यभर में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
चंपाई सोरेन के बेटे बाबूलाल को टिकट देना बना चर्चा का विषय
गौरतलब है कि बाबूलाल सोरेन, झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता चंपाई सोरेन के पुत्र हैं। ऐसे में भाजपा द्वारा उन्हें उम्मीदवार बनाना राजनीतिक रूप से एक मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा अब झामुमो के गढ़ में सीधे सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है।
घाटशिला- 2024 विधानसभा चुनाव परिणाम
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राम दास सोरेन (JMM): 98,356 वोट
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बाबूलाल सोरेन (BJP): 75,910 वोट
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रामदास मुर्मू (JLKM): 8,092 वोट
इस परिणाम से स्पष्ट है कि JMM के उम्मीदवार राम दास सोरेन ने भाजपा के बाबूलाल सोरेन पर मजबूत बढ़त बनाई थीहै। चुनावी मुकाबले में JMM का परंपरागत आधार और वोट बैंक प्रभावी साबित हुआ।
झामुमो के गढ़ में भाजपा की चुनौती
घाटशिला सीट पारंपरिक रूप से झामुमो का मजबूत इलाका रहा है, लेकिन भाजपा ने जातीय और पारिवारिक समीकरण को ध्यान में रखते हुए बाबूलाल सोरेन को मैदान में उतारा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का यह कदम आदिवासी समुदाय में अपने प्रभाव को बढ़ाने की कोशिश है।
झारखंड की सियासत में बढ़ा तापमान
बाबूलाल सोरेन की उम्मीदवारी की घोषणा के बाद झारखंड की राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई है। जहां भाजपा समर्थक इस फैसले को “गेम चेंजर” बता रहे हैं.
भाजपा के लिए बड़ा जोखिम या मौका?
राजनीतिक पंडितों के अनुसार, भाजपा ने इस उम्मीदवार चयन के जरिए एक बड़ा जोखिम भी लिया है। क्योंकि, चंपाई सोरेन के परिवार से जुड़ा नाम होने के कारण झामुमो के कार्यकर्ता भी विभाजित हो सकते हैं। वहीं, आदिवासी इलाकों में भाजपा की पैठ मजबूत करने की संभावना भी बढ़ी है।
झारखंड की जनता की नजरें अब घाटशिला पर
घाटशिला उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह झारखंड की राजनीति के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इस चुनाव का परिणाम न केवल भाजपा और झामुमो के भविष्य का संकेत देगा, बल्कि राज्य में आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा भी तय कर सकता है।
बाबूलाल सोरेन की उम्मीदवारी से घाटशिला उपचुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। भाजपा के लिए यह मौका है झामुमो के परंपरागत वोटबैंक में सेंध लगाने का, जबकि झामुमो के लिए यह प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है। अब सबकी निगाहें जनता के फैसले पर टिकी हैं.
