नेतृत्व संकट से जूझ रही भाजपा, संगठन को संभालने में जुटे मोर्चे और प्रकोष्ठ।

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झारखंड में भाजपा नेतृत्व संकट: प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष का चयन अधर में

तीन महीने बाद भी नहीं हुआ निर्णय

झारखंड विधानसभा चुनाव को तीन महीने से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी अब तक विधायक दल के नेता का चयन नहीं कर पाई है। राज्य में बजट सत्र भी शुरू हो चुका है, जिससे मार्च में प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की संभावना बेहद कम हो गई है। ऐसे में कार्यकर्ताओं को इस फैसले के लिए और इंतजार करना होगा।

केंद्रीय नेतृत्व की निष्क्रियता

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की ओर से भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। राज्य विधानसभा का बजट सत्र जारी है, लेकिन अब तक विधायक दल के नेता का चयन नहीं हुआ है। माना जा रहा है कि केंद्रीय नेतृत्व अब अप्रैल में प्रदेश अध्यक्ष के नाम को अंतिम रूप दे सकता है।

वर्तमान संगठन को सक्रिय रहने के निर्देश

भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने फिलहाल प्रदेश की मौजूदा कमेटी को ही सक्रियता से कार्य करने के निर्देश दिए हैं। बीते दिनों बीएल संतोष रांची पहुंचे थे, जहां उन्होंने चुनाव प्रक्रिया और संगठन की स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेताओं से मिले फीडबैक को केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया है।

मोर्चों को दिए गए विशेष निर्देश

नई प्रदेश कमेटी के गठन तक पार्टी के विभिन्न प्रकोष्ठों और मोर्चों को सक्रिय रखने की रणनीति अपनाई गई है। हाल ही में ओबीसी मोर्चा ने सदस्यता अभियान में अहम भूमिका निभाई, जबकि महिला मोर्चा, युवा मोर्चा और अन्य संगठनों को भी सक्रिय कार्यक्रमों के संचालन के निर्देश दिए गए हैं।

भाजपा की रणनीतिक चुनौती

भाजपा के नेतृत्व में जारी यह असमंजस राज्य में पार्टी की राजनीतिक स्थिति को प्रभावित कर सकता है। सत्ता पक्ष इस देरी को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा अप्रैल में प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर कितनी तेजी दिखाती है।

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