सामाजिक कल्याण पर बड़ा दांव, इंफ्रास्ट्रक्चर को रफ्तार- जानिए बजट की बड़ी बातें

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झारखंड बजट 2026-27: 1.58 लाख करोड़ से अधिक का आकार

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार ने कुल 1,58,560 करोड़ रुपये का बजट अनुमान पेश किया है। पिछले वर्ष की तुलना में बजट आकार में वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य की बढ़ती विकास प्राथमिकताओं को दर्शाता है

सरकार ने इस बजट में बुनियादी ढांचे, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और ग्रामीण विकास पर विशेष फोकस रखा है।

राजस्व प्राप्ति: टैक्स से सबसे ज्यादा कमाई

बजट दस्तावेज के अनुसार वर्ष 2026-27 में कुल राजस्व प्राप्ति 1,36,210 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है

राजस्व के प्रमुख स्रोत इस प्रकार हैं –

  • राज्य का अपना कर राजस्व: लगभग 46,000 करोड़ रुपये

  • केंद्र करों में राज्य का हिस्सा: 51,236 करोड़ रुपये

  • राज्य के अपने गैर-कर राजस्व: 20,700 करोड़ रुपये

  • केंद्र से अनुदान: 18,273 करोड़ रुपये

“Rupee Comes From” चार्ट (पेज 5) के अनुसार राज्य को सबसे बड़ा हिस्सा केंद्र करों से 32.31% और राज्य के अपने करों से 29.02% प्राप्त होगा। वहीं उधारी का हिस्सा 13.91% और केंद्र अनुदान 11.52% रहेगा

व्यय का खाका: सामाजिक कल्याण पर सबसे अधिक खर्च

राज्य सरकार का कुल व्यय 1,58,560 करोड़ रुपये प्रस्तावित है

“Rupee Goes To” चार्ट (पेज 6) के अनुसार खर्च का वितरण इस प्रकार रहेगा –

  • सामाजिक कल्याण एवं कल्याणकारी योजनाएं: 16.75%

  • शिक्षा: 11.87%

  • ऊर्जा: 7.06%

  • पुलिस एवं आपदा प्रबंधन: 6.89%

  • पेंशन: 6.29%

  • सड़क एवं परिवहन: 4.38%

  • कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (जल संसाधन सहित): 4.79%

यह स्पष्ट संकेत है कि सरकार सामाजिक सुरक्षा और मानव संसाधन विकास पर प्राथमिकता दे रही है

राजकोषीय स्थिति: घाटे पर नियंत्रण की कोशिश

बजट दस्तावेज के अनुसार:

  • राजस्व घाटा: लगभग 15,358 करोड़ रुपये

  • प्रभावी राजस्व घाटा: 28,102 करोड़ रुपये

  • राजकोषीय घाटा: 13,595 करोड़ रुपये

  • राजकोषीय घाटा GSDP का लगभग 2.18%

सरकार ने FRBM अधिनियम के तहत वित्तीय अनुशासन बनाए रखने का लक्ष्य रखा है

पूंजीगत व्यय में बढ़ोतरी

पूंजीगत व्यय 37,708 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है। यह दर्शाता है कि सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर और दीर्घकालिक परिसंपत्तियों के निर्माण पर ध्यान दे रही है

निष्कर्ष: विकास और संतुलन की रणनीति

झारखंड बजट 2026-27 में सरकार ने एक ओर जहां सामाजिक सुरक्षा और कल्याणकारी योजनाओं पर बड़ा फोकस रखा है, वहीं दूसरी ओर पूंजीगत निवेश बढ़ाकर भविष्य की आर्थिक मजबूती की नींव रखने की कोशिश की है।

राजकोषीय घाटा 3% की सीमा के भीतर रखने का लक्ष्य यह दर्शाता है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

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