PESA Act Jharkhand

बंधु तिर्की बोले: पेसा जैसे आदिवासी हितैषी कानून पर मुखर होना समय की मांग.

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर राष्ट्रीय ख़बर विधानसभा चुनाव

संविधान बचाओ अभियान और पेसा कानून पर मुखर हुई कांग्रेस: बंधु तिर्की बोले- आदिवासी अधिकारों की रक्षा अब जरूरी लड़ाई

मुख्य बिंदु:

  • कांग्रेस नेता बंधु तिर्की ने पेसा कानून के क्रियान्वयन को बताया अत्यावश्यक

  • राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस का संविधान बचाओ अभियान हुआ तेज

  • झारखंड में आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों पर चुप्पी पर सवाल

  • बंधु तिर्की ने सोशल मीडिया पर जताई चिंता



बंधु तिर्की की चिंता

झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने पेसा कानून (PESA Act – Panchayats (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996) को लेकर अपनी राय ज़ाहिर की है। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस संविधान बचाओ अभियान को राष्ट्रीय स्तर पर राहुल गांधी के नेतृत्व में मजबूती से आगे बढ़ा रही है, तो ऐसे संवैधानिक प्रावधानों के प्रति मुखर रहना और भी जरूरी हो जाता है।

पेसा कानून: आदिवासियों के लिए संवैधानिक सुरक्षा कवच

पेसा कानून, अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अधिकार देता है ताकि स्थानीय आदिवासी समुदाय अपनी परंपरागत व्यवस्थाओं के तहत जमीन, जल, जंगल की रक्षा कर सकें। यह कानून आदिवासियों को उनके संसाधनों पर स्वशासन का अधिकार देता है। लेकिन झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इसका प्रभावी क्रियान्वयन अब तक अधूरा है।

बंधु तिर्की का यह बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि सरकार ने पेसा को लागू करने की नीयत तो जताई, लेकिन ज़मीनी स्तर पर अब भी यह कानून सिर्फ फाइलों तक सीमित है।

बंधु तिर्की का संकेत: संवैधानिक अधिकारों पर खतरे की आहट

बंधु तिर्की ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा:

“संविधान बचाओ अभियान की लड़ाई तब और भी ज्यादा जरूरी हो जाती है जब प्रावधान पेसा जैसे आदिवासी हितैषी कानून से ताल्लुकात रखते हों।”

इस बयान के माध्यम से उन्होंने संकेत दिया कि जब तक संविधान में दिए गए अधिकारों का जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन नहीं होता, तब तक लोकतंत्र अधूरा है। उनका इशारा स्पष्ट है कि आदिवासी समाज को उनके हक से वंचित किया जा रहा है, जो एक बड़ा संवैधानिक सवाल है।

झारखंड की जमीनी हकीकत

राज्य सरकार ने भले ही पेसा कानून लागू करने की घोषणा की हो, लेकिन आज भी झारखंड के अधिकांश ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा की शक्तियां व्यवहार में नहीं आई हैं। वन भूमि पर अधिकार, खनन में भागीदारी, परंपरागत न्याय व्यवस्था – ये सब अब भी अधूरी हैं।

राजनीतिक चेतना की आवश्यकता

बंधु तिर्की का यह वक्तव्य कांग्रेस की नीतिगत सोच को दर्शाता है जिसमें संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय का एजेंडा प्राथमिकता पर है। पेसा जैसे कानूनों को केवल कागजों तक सीमित रखने की जगह, ज़मीनी स्तर पर लागू करना, लोकतंत्र की मजबूती और आदिवासियों के हक की रक्षा के लिए बेहद आवश्यक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *