अरविंद कुमार झा को बरलिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की मानद उपाधि.

झारखंड/बिहार राष्ट्रीय ख़बर

मुख्य बिंदु:

इंडिया हैबिटेट सेंटर, दिल्ली में 27 जुलाई को हुआ सम्मान समारोह

ब्लड बैंक संचालन और रक्तदान जागरूकता में रहा अहम योगदान

हेल्थकेयर और सोशल सर्विस में उत्कृष्ट योगदान के लिए मिला डॉक्टरेट

समाज के वंचित वर्गों के लिए लगातार कार्यरत रहे अरविंद झा

युवाओं को प्रेरित करने वाली उपलब्धि



नई दिल्ली, 28 जुलाई 2025- स्वास्थ्य और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में दो दशक से अधिक योगदान देने वाले शोणित फाउंडेशन के अध्यक्ष और ब्लड बैंक के संचालक अरविंद कुमार झा को बरलिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी, यूएसए द्वारा डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी इन हेल्थ केयर एंड सोशल सर्विस की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें इंटेलेक्चुअल कॉन्क्लेव – 2025 के अंतर्गत नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में प्रदान किया गया।

समाज सेवा के क्षेत्र में अहम योगदान

अरविंद कुमार झा पिछले 25 वर्षों से रक्तदान शिविरों के आयोजन और रक्त की सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं। उनके नेतृत्व में शोणित फाउंडेशन ने न केवल सैकड़ों रक्तदान शिविरों का आयोजन किया, बल्कि हजारों मरीजों को जीवनदायी रक्त भी उपलब्ध कराया।

रक्तदान के प्रति जागरूकता अभियान

उन्होंने समाज में रक्तदान को लेकर सकारात्मक सोच पैदा करने हेतु विभिन्न जनजागरण कार्यक्रम चलाए, जिससे युवाओं और आम नागरिकों में रक्तदान की आदत को बढ़ावा मिला। इसके साथ ही उन्होंने जरूरतमंदों को समय पर रक्त दिलाने के लिए समर्पित नेटवर्किंग और टेक्नोलॉजी आधारित समाधान तैयार किए।

ब्लड बैंक प्रबंधन में आधुनिकता

एक ब्लड बैंक संचालक के तौर पर उन्होंने आधुनिक मशीनरी और नवीनतम उपकरणों का समावेश कर रक्त जांच एवं स्टोरेज प्रणाली को और भी बेहतर बनाया। उनके प्रयासों से कई लोगों की कीमती जानें बच सकीं, और ब्लड बैंक को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवा का केंद्र बनाया गया।

वंचित वर्गों के लिए काम

अरविंद झा ने केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्गों के लिए सामाजिक सेवा के भी कई कार्य किए। शिक्षा, स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़ी समस्याओं को हल करने में उन्होंने सक्रिय भागीदारी निभाई।

युवाओं के लिए प्रेरणा

उनकी इस महत्वपूर्ण उपलब्धि से न सिर्फ स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वालों को सम्मान मिला है, बल्कि यह युवाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है। उनकी कहानी यह बताती है कि लगातार सेवा और समर्पण से कैसे कोई व्यक्ति समाज में बदलाव ला सकता है।

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