मुख्य बिंदु-
-
डॉ. प्रदीप वर्मा ने मोदी सरकार द्वारा जाति जनगणना के निर्णय पर आभार व्यक्त किया।
-
कांग्रेस और झामुमो पर श्रेय लेने का आरोप।
-
मोदी सरकार की 11 सालों से सामाजिक न्याय की नीति की सराहना।
-
कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक मान्यता नहीं दी।
-
हेमंत सरकार पर आरोप, पिछड़ों को आरक्षण से वंचित रखा।
भाजपा प्रदेश महामंत्री और सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने जाति जनगणना पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया, कांग्रेस और झामुमो पर कसा तंज
रांची। भाजपा प्रदेश महामंत्री और सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा ने केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जाति जनगणना के निर्णय पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूरी कैबिनेट का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय ऐतिहासिक है और 2047 के विकसित भारत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

डॉ. वर्मा ने सस्ती लोकप्रियता हासिल करने की होड़ में कांग्रेस और झामुमो पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों पार्टियां जाति जनगणना के मुद्दे पर जनता को धोखा दे रही हैं और अब अपनी पीठ थपथपाने में लगी हैं।
मोदी सरकार की सच्ची नीयत:
उन्होंने कहा कि यह निर्णय केंद्र की मोदी सरकार द्वारा 11 वर्षों से चली आ रही नीति का परिणाम है, जो सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य सबका साथ, सबका विकास है। भाजपा सरकार ने हमेशा सामाजिक न्याय को प्राथमिकता दी है और अंत्योदय हमारा मूल मंत्र है।”
इसे भी पढ़ें-
JMM का BJP पर हमला, कहा- धार्मिक उन्माद फैलाकर सत्ता हथियाना चाहती है पार्टी.
कांग्रेस की खोखली नीतियां:
डॉ. वर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी ने काका कालेकर कमिटी की रिपोर्ट को वर्षों तक दबाए रखा और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक मान्यता नहीं दी। उन्होंने यह भी कहा कि यह मोदी सरकार है जिसने पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक मान्यता प्रदान की है।
झारखंड की हेमंत सरकार पर हमला:
उन्होंने झारखंड की हेमंत सरकार को भी आड़े हाथों लिया, जो कांग्रेस के समर्थन से पिछले छह वर्षों से सत्ता में है। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार ने पंचायत चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण से वंचित किया और ट्रिपल टेस्ट न कराए जाने के कारण राज्य में निकाय चुनाव लंबित हैं।
नेहरू का विरोध:
डॉ. वर्मा ने यह भी कहा कि 1931 के बाद भारत में जाति जनगणना नहीं हुई। उन्होंने सवाल उठाया कि जब 1951 में स्वतंत्र भारत की पहली जनगणना हुई, तो पंडित नेहरू ने जाति जनगणना क्यों नहीं कराई, जबकि वह जातिगत आरक्षण के भी विरोधी थे।
कांग्रेस की दोहरी नीति:
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अब श्रेय लेने की होड़ में लगी है, लेकिन 2011 में कांग्रेस ने खुद जाति जनगणना के लिए गठित मंत्री समूह से हाथ खींच लिया था। यह कांग्रेस की इच्छा शक्ति की कमी को दर्शाता है।
भाजपा की सामाजिक न्याय की दिशा:
डॉ. वर्मा ने अंत में कहा कि भाजपा सरकार देश की प्रगति, वंचितों के अधिकार और सामाजिक न्याय की दिशा में पूरी ईमानदारी और निष्ठा से काम कर रही है।
इस प्रेसवार्ता में प्रदेश मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और प्रदेश प्रवक्ता अजय साह भी उपस्थित रहे।
