📌 मुख्य बिंदु:
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आदिवासी समाज का धर्मांतरण के खिलाफ आक्रामक रुख
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घुसपैठियों के खिलाफ सड़कों पर उतरने की तैयारी
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आरक्षण नीति में बदलाव की मांग
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पारंपरिक जीवनशैली की रक्षा का आह्वान
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राजनगर में भारी जन समर्थन
राजनगर में उमड़ा जनसैलाब, धर्मांतरण और घुसपैठियों के खिलाफ आदिवासी समाज की हुंकार
राजनगर। झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन की उपस्थिति में राजनगर में एक विशाल सभा का आयोजन किया गया, जिसमें आदिवासी समाज ने धर्मांतरण और बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। जनसभा में उमड़े हजारों लोगों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन अब सिर्फ झारखंड नहीं, बल्कि पूरे देश में गूंजेगा।
चंपई सोरेन के नेतृत्व में लाखों आदिवासी सड़कों पर उतरने को तैयार
सभा को संबोधित करते हुए चंपई सोरेन ने कहा, “यह तो सिर्फ शुरुआत है। जल्द ही **लाखों आदिवासी अपने अधिकार और अस्मिता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरेंगे।” उन्होंने परंपरागत आदिवासी जीवनशैली को बचाने की जरूरत पर बल दिया।
धर्म परिवर्तन वालों को नहीं मिलना चाहिए आरक्षण: चंपई सोरेन
सभा में चंपई सोरेन ने दो टूक कहा, “जो लोग आदिवासी संस्कृति छोड़ते हैं, दूसरे धर्म में विवाह करते हैं या रूढ़िवादी परंपरा त्याग देते हैं, उन्हें आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए।” उन्होंने सरकार से आरक्षण नीति पर पुनर्विचार की मांग की।
राजनगर की जनता का मिला अपार समर्थन
आयोजकों ने राजनगर की जनता का आभार जताया और कहा कि यह समर्थन आदिवासी समाज की एकता और जागरूकता का प्रतीक है। चंपई सोरेन ने कहा, “आपका समर्थन हमारी ताकत है, और यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है।”
