झारखंड में वित्त रहित शिक्षा संस्थानों का आंदोलन तेज, 17 मार्च को विधानसभा के सामने विशाल महाधरना
मुख्य बिंदु
• 17 मार्च को विधानसभा के सामने वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा का महाधरना
• अनुदान राशि जारी नहीं होने और 75% अनुदान वृद्धि की मांग
• राज्यभर के हजारों शिक्षक-कर्मचारी आंदोलन में होंगे शामिल
• चार लाख से अधिक छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका
अनुदान राशि जारी नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश
झारखंड में वित्त रहित शिक्षा संस्थानों से जुड़े शिक्षक और कर्मचारी एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में हैं। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने घोषणा की है कि अपनी लंबित मांगों को लेकर 17 मार्च 2026 को विधानसभा के सामने विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा।
मोर्चा का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए स्वीकृत अनुदान राशि अब तक स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संस्थाओं को नहीं भेजी गई है, जिससे शिक्षकों और कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
विधानसभा धरना स्थल पर लिया गया आंदोलन का निर्णय
संघर्ष मोर्चा की ओर से बताया गया कि 10 मार्च 2026 को विधानसभा धरना स्थल पर आयोजित बैठक में सर्वसम्मति से आंदोलन का निर्णय लिया गया। बैठक में यह तय किया गया कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
मोर्चा के नेताओं ने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से लगातार देरी और उदासीन रवैये के कारण शिक्षक-कर्मचारियों में भारी नाराजगी है।
वित्तीय वर्ष समाप्ति से पहले राशि जारी करने की मांग
मोर्चा के अनुसार वित्तीय वर्ष समाप्ति के करीब है और 20 मार्च के बाद 31 मार्च तक कई पर्व-त्योहारों के कारण सरकारी छुट्टियां भी रहेंगी।
ऐसे में यदि अनुदान राशि जल्द जारी नहीं की गई तो राशि लैप्स होने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे कई संस्थान आर्थिक संकट में आ सकते हैं।
550 से अधिक संस्थानों ने किया है आवेदन
संघर्ष मोर्चा ने बताया कि इस वर्ष अनुदान के लिए
-
172 इंटर कॉलेज
-
315 उच्च विद्यालय
-
30 संस्कृत विद्यालय
-
33 मदरसा विद्यालय
ने ऑनलाइन आवेदन किया है।
इन संस्थानों द्वारा लगभग डेढ़ महीने पहले ही आवेदन प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी, लेकिन अब तक अनुदान समिति की बैठक नहीं हो सकी है।
फिर से जांच कराने के फैसले पर विरोध
मोर्चा ने सरकार द्वारा 75 प्रतिशत अनुदान वृद्धि को लेकर पुनः जांच कराने के फैसले पर भी कड़ा विरोध जताया है।
नेताओं का कहना है कि एक माह पहले ही जिला शिक्षा पदाधिकारी और जैक द्वारा जियो टैगिंग और वीडियो के साथ संस्थानों की जांच की जा चुकी है। ऐसे में फिर से जांच कराने का कोई औचित्य नहीं है।
मोर्चा के नेताओं का आरोप है कि बार-बार जांच कराने से भ्रष्टाचार की आशंका पैदा होती है, जिसका वे विरोध करेंगे।
चार लाख छात्रों की पढ़ाई से जुड़ा मामला
मोर्चा का दावा है कि राज्य में चार लाख से अधिक छात्र इन वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई कर रहे हैं।
इन संस्थानों में करीब 7000 से 8000 शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं, जिनके लिए अनुदान ही आय का मुख्य स्रोत है। ऐसे में अनुदान में देरी से हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं।
अन्य लंबित योजनाओं को लेकर भी नाराजगी
मोर्चा ने यह भी कहा कि शिक्षकों को वेतन देने के मुद्दे पर कार्मिक विभाग ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को पत्र भेजा है, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके अलावा सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना को लेकर भी सरकार द्वारा सदन में दिए गए आश्वासन के बावजूद मामला लंबित है।
17 मार्च को हजारों शिक्षक करेंगे प्रदर्शन
इन्हीं लंबित मांगों को लेकर वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा 17 मार्च 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विधानसभा के सामने विशाल महाधरना आयोजित करेगा।
मोर्चा का दावा है कि इस प्रदर्शन में राज्यभर से हजारों शिक्षक और कर्मचारी भाग लेंगे।
इस संबंध में जानकारी मोर्चा के प्रतिनिधि मनीष कुमार और अरविंद सिंह ने प्रेस को दी है।
