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संताल में क्यों कैंप कर रहे हैं जयराम महतो। JBKSS की मौजूदगी का क्या है मतलब।

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झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति के केंद्रीय अध्यक्ष जयराम महतो और उनकी पार्टी संताल परगना में भी राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश कर रही है। पार्टी ने दुमका लोकसभा सीट से बेबी लता टुडू को चुनावी मैदान में उतारा है।

हाइलाइट्स-

  1. संताल पर जयराम महतो की नज़र।
  2. राजनीतिक तौर पर संताल का महत्व। 
  3. दुमका में सीता और नलिन सोरेन आमने-सामने।
  4. जेबीकेएसएस का कितना रहेगा प्रभाव। 
  5. जयराम महतो के हौंसले बुलंद। 

 

संताल पर जयराम महतो की नज़र।

झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति की तरफ से राजमहल और गोड्डा लोकसभा सीट में प्रत्याशी नहीं दिए गए हैं। इसके पीछे दलील दी जा रही है कि, इन दो लोकसभा सीटों पर पार्टी की तैयारी नहीं है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता विजय कुमार सिंह की मानें तो बेबी लता टुडू दुमका लोकसभा सीट से काफी पहले से तैयारी कर रही हैं। पिछले दो दिनों से जयराम महतो भी दुमका लोकसभा सीट में कैंप कर रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि, दुमका के साथ ही संताल परगना में जयराम महतो का प्रभाव छोड़ा जाए।

राजनीतिक तौर पर संताल का महत्व। 

एक बात तो बिल्कुल साफ है कि, झारखंड की राजनीति में अगर आपको अपनी पहचान बनानी है तो फिर संताल परगना में आपको मजबूत होना जरूरी है। यह बात जयराम महतो और उनकी पार्टी भी जानती है। यही वजह है कि, कोल्हान और कोयलांचल के साथ ही पार्टी संताल परगना में भी अपनी पूरी ताकत लगा रही है। पार्टी के केंद्रीय प्रवक्ता विजय कुमार सिंह कहते हैं कि, हमारी कोशिश है कि, नलिन सोरेन और सीता सोरेन के साथ ही हम अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करें। दुमका की लड़ाई को हम त्रिकोणीय बनाना चाहते हैं।

दुमका में सीता और नलिन सोरेन आमने-सामने।

आपको बता दें कि, भाजपा ने सोरेन परिवार की पुत्रवधू सीता सोरेन को दुमका लोकसभा सीट से चुनावी मैदान उतारा है। उनके सामने झारखंड मुक्ति मोर्चा के नलिन सोरेन दो-दो हाथ कर रहे हैं। भाजपा पूरी ताकत के साथ दुमका लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ रही है। यही वजह है कि, पहले गृह मंत्री, फिर रक्षा मंत्री और अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभा दुमका लोकसभा सीट में कराई गई है।

जेबीकेएसएस का कितना रहेगा प्रभाव। 

ऐसे में क्या जयराम महतो की पार्टी झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति दुमका या फिर संताल परगना में अपना प्रभाव छोड़ पाएगी। यह कहना बेहद मुश्किल है। फिलहाल संताल सोरेन परिवार के बेहद नजदीक है। यही वजह है कि, हेमंत सोरेन की गैर मौजूदगी में कल्पना मुर्मू सोरेन पूरी ताकत लगा रही हैं। झारखंडी भाषा खतियान संघर्ष समिति ने गिरिडीह के साथ कुल 8 लोकसभा सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। सबसे मजबूत दावेदारी गिरिडीह लोकसभा सीट को लेकर की जा रही है। पार्टी का मानना है कि, गिरिडीह लोकसभा सीट में इस बार बदलाव तय है।

जयराम महतो के हौंसले बुलंद। 

कुल मिलाकर कहें तो जयराम महतो और उनकी पार्टी के हौंसले बुलंद हैं। पार्टी को जो फीडबैक मिला है उससे जेबीकेएसएस खुश है। हालांकि, पार्टी का यह पहला चुनाव है। राजनीति में उनकी मौजूदगी बेहद कम दिनों से है।। ऐसे में 4 जून के नतीजे बताएंगे की जयराम और उनकी पार्टी का राजनीतिक भविष्य क्या होगा। कहा जाता है कि, चुनावी सभाओं में जो भीड़ जुटती है वो वोट में परिवर्तित नहीं होती है। अगर जयराम ने इस बात को झुठला दिया तो फिर राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेगा नहीं तो जयराम का राजनीतिक संघर्ष का यहीं से आग़ाज़ माना जाएगा।

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