“750 करोड़ Liquor Scam!”: Babulal Marandi का बड़ा आरोप, ACB पर ‘भ्रष्टाचारियों को बचाने’ का खेल EXPOSED
मुख्य बिंदु
750 करोड़ से ज्यादा के शराब घोटाले में बड़ा खुलासा
ACB पर आरोप—जानबूझकर चार्जशीट नहीं दाखिल
14 आरोपियों को मिल चुकी है Default Bail
राज्यपाल से CBI जांच की मांग
Jharkhand Liquor Scam: नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi का बड़ा हमला
झारखंड में कथित 750 करोड़ रुपये के शराब घोटाले को लेकर सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष Babulal Marandi ने राज्यपाल को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं।
उन्होंने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी Anti Corruption Bureau (ACB) की भूमिका पर सवाल उठाया है और इसे “संदेहास्पद” बताया है।
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ACB पर गंभीर आरोप: “चार्जशीट नहीं, आरोपियों को बचाने की साजिश!”
मरांडी ने आरोप लगाया कि ACB ने इस मामले में 90 दिनों की वैधानिक समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की, जिसका सीधा फायदा आरोपियों को मिला।
17 में से 14 आरोपी Default Bail पर बाहर
8 महीने बाद भी एक भी चार्जशीट दाखिल नहीं
उन्होंने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि “सुनियोजित साजिश” है।
Liquor Policy से शुरू हुआ खेल, घोटाला पहुँचा 750 करोड़ तक
पत्र में दावा किया गया है कि:
2022 में उत्पाद नीति में बदलाव कर एक सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया
शुरुआत में घोटाला 38 करोड़ का बताया गया
अब यह बढ़कर 750 करोड़+ हो चुका है
कौन-कौन फंसे इस घोटाले में?
इस मामले में कई बड़े नाम सामने आए:
तत्कालीन उत्पाद सचिव IAS विनय कुमार चौबे
संयुक्त उत्पाद आयुक्त गजेंद्र सिंह
JSBCL के अधिकारी और अन्य कारोबारी
लेकिन…
समय पर चार्जशीट न होने के कारण सभी को जमानत मिल गई
Default Bail का बड़ा खेल!
IAS अधिकारी को BNSS की धारा 187(2) के तहत बेल
बाकी आरोपियों को भी उसी आधार पर राहत
मरांडी का आरोप है कि यह सब ACB की जानबूझकर की गई देरी का परिणाम है।
एक आरोपी फरार, ACB पर और सवाल
छत्तीसगढ़ के कारोबारी नवीन केडिया का मामला भी सामने आया:
गिरफ्तारी के बाद ट्रांजिट बेल
फिर पुलिस को चकमा देकर फरार
इससे ACB की कार्यशैली पर और गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
राज्यपाल से मांग: CBI जांच हो!
मरांडी ने झारखंड के राज्यपाल Santosh Kumar Gangwar से अपील की है:
ACB को तुरंत चार्जशीट दाखिल करने का निर्देश दिया जाए
पूरे मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) को सौंपी जाए
बड़ा सवाल
क्या यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही है या बड़ा खेल?
क्या 750 करोड़ का घोटाला दबाने की कोशिश हो रही है?
क्या CBI जांच से सच सामने आएगा?
आपकी राय?
क्या झारखंड में इस मामले की CBI जांच होनी चाहिए?
Comment में जरूर बताएं
