ED का शिकंजा कसा, पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव और बेटे रोहित उरांव तलब

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झारखंड शराब घोटाला: पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव और बेटे रोहित उरांव को ED का समन, सोमवार-मंगलवार को होगी पूछताछ

रांची: झारखंड के बहुचर्चित शराब घोटाले की जांच एक बार फिर तेज हो गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव तथा उनके बेटे रोहित उरांव को पूछताछ के लिए समन जारी किया है। दोनों को सोमवार और मंगलवार को रांची स्थित ED के क्षेत्रीय कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। एजेंसी कथित वित्तीय लेनदेन, शराब सिंडिकेट और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं पर उनसे पूछताछ कर सकती है।

प्रमुख बातें
ED ने पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव और बेटे रोहित उरांव को समन भेजा।
सोमवार और मंगलवार को रांची कार्यालय में होगी पूछताछ।
जांच में छत्तीसगढ़ की कंपनियों को झारखंड में टेंडर मिलने की भूमिका की जांच।
रोहित उरांव के घर 2023 में हुई छापेमारी के दौरान 30 लाख रुपये मिलने का दावा।
कथित वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और डिजिटल साक्ष्यों की होगी पड़ताल।

2023 की छापेमारी फिर चर्चा में
ED ने 23 अगस्त 2023 को रांची सहित कई स्थानों पर छापेमारी की थी। इस दौरान रोहित उरांव के आवास पर भी कार्रवाई हुई थी। जांच एजेंसी के अनुसार, उस समय वहां से लगभग 30 लाख रुपये बरामद किए गए थे। इसके बाद मामले में कई नए तथ्य सामने आए, जिसके आधार पर अब जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ की कंपनियों को टेंडर मिलने पर संदेह
जांच एजेंसी को संदेह है कि झारखंड की नई उत्पाद नीति-2022 लागू होने के दौरान छत्तीसगढ़ की कुछ कंपनियों को राज्य में शराब सप्लाई और संचालन से जुड़े ठेके दिलाए गए। ED यह भी जांच कर रही है कि इनमें से एक कंपनी को टेंडर दिलाने में किसी प्रभाव या सिफारिश की भूमिका तो नहीं रही।

रोहित उरांव से किन मुद्दों पर हो सकती है पूछताछ?
सूत्रों के अनुसार, ED रोहित उरांव से छत्तीसगढ़ की कंपनियों से जुड़े वित्तीय दस्तावेज, बैंक खातों के लेनदेन, डिजिटल रिकॉर्ड और एक शराब कारोबारी के साथ कथित साझेदारी को लेकर सवाल पूछ सकती है। एजेंसी इन सभी दस्तावेजों का मिलान पहले से जुटाए गए डिजिटल साक्ष्यों से करेगी।

रामेश्वर उरांव से क्या पूछ सकती है ED?
जांच एजेंसी पूर्व मंत्री रामेश्वर उरांव से नई उत्पाद नीति को मंजूरी देने की प्रक्रिया, संबंधित विभागीय निर्णयों और कथित तौर पर कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने के आरोपों को लेकर सवाल पूछ सकती है। हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।

अब तक 18 आरोपी गिरफ्तार, सभी को मिली जमानत
इस मामले में एसीबी ने पहले आईएएस अधिकारी विनय चौबे सहित 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। बाद में समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं होने के कारण सभी को डिफॉल्ट बेल मिल गई। इसके बाद ED ने पीएमएलए के तहत जांच को आगे बढ़ाते हुए कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल शुरू की।

जांच में सामने आए आरोप
जांच एजेंसियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में आरोप है कि नई उत्पाद नीति के दौरान टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं हुईं। साथ ही कुछ कंपनियों को लाभ पहुंचाने, शराब कारोबार से जुड़े अवैध वित्तीय लेनदेन और कथित कमीशन नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।

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