देशभर में फ्लाइट संकट गहराया, यात्रियों की मुश्किलें बढ़ीं
रांची- देशभर में जारी फ्लाइट संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। कई प्रमुख एयरपोर्ट्स पर स्थिति लगभग आपातकालीन बन चुकी है, जहां लाखों यात्री कड़ाके की ठंड में फँसे हुए हैं। उड़ानें लगातार डिले और कैंसिल हो रही हैं, जबकि कुछ एयरपोर्ट्स पर संचालन आंशिक रूप से ठप पड़ गया है।
टिकटों के दाम 1 लाख तक पहुंचे, यात्रियों में नाराज़गी
उड़ानों में देरी और कमी के बीच हवाई किराया सामान्य से कई गुना बढ़ गया है। जो टिकटें आमतौर पर 6,000 से 8,000 रुपये में मिलती थीं, वे अब 80,000 से 1,00,000 रुपये तक बिक रही हैं। इससे छात्र-छात्राओं, महिलाओं, बुजुर्गों और नौकरीपेशा यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। कई लोग 24 घंटे नहीं, बल्कि दो-दो दिनों से एयरपोर्ट पर फंसे हुए हैं।
इरफान अंसारी का केंद्र सरकार पर हमला
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस स्थिति को “केंद्र सरकार की लापरवाही” का परिणाम बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों पर इसका भारी आर्थिक बोझ पड़ा है, जबकि केंद्र सरकार स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रही है।
अंसारी ने प्रधानमंत्री व नागरिक उड्डयन मंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि उड़ान किराए पर नियंत्रण लगाया जाए और फँसे हुए यात्रियों को तुरंत राहत प्रदान की जाए।
राहुल गांधी से भी की विशेष अपील
इरफान अंसारी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से भी इस राष्ट्रीय संकट पर तत्काल संज्ञान लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “देशभर के एयरपोर्ट्स पर हालत बिगड़ते जा रहे हैं, लाखों परिवार परेशान हैं, और लोगों की उम्मीदें राहुल गांधी से ही जुड़ी हैं।”
अंसारी ने दावा किया कि “व्यवस्था चरमरा चुकी है और केंद्र सरकार से अब किसी राहत की उम्मीद नहीं बची है, ऐसे में देश को इस संकट से निकालने की जिम्मेदारी विपक्ष को उठानी चाहिए।”
यात्रियों को तुरंत राहत देने की मांग
देशभर में बढ़ते तनाव और अव्यवस्था को देखते हुए विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी मांग की है कि
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फ्लाइट संचालन को सामान्य किया जाए
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किराए पर नियंत्रण लगाया जाए
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फंसे यात्रियों के लिए अस्थायी इंतज़ाम किए जाएँ
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एयरपोर्ट्स पर मेडिकल व फूड सहायता बढ़ाई जाए
हालात कब तक सामान्य होंगे, इसे लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। हालांकि यात्रियों की संख्या और बढ़ती अव्यवस्था को देखते हुए स्थिति जल्द सुधरने की उम्मीद कम ही दिख रही है।
