युवाओं के दिल पर बढ़ रहा खतरा! डॉ. नरेश त्रेहन ने बताए बचाव के जरूरी तरीके

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दिल की बीमारियों के उजागर होने की राह मत देखें, समय रहते हो जाएं सतर्क

डॉ. नरेश त्रेहन ने हृदय रोग के बढ़ते जोखिम को लेकर किया आगाह, बोले- लक्षणों का इंतजार करने के बजाय पहले से पहचान जरूरी

हृदय रोग को लंबे समय तक उम्रदराज लोगों से जुड़ी बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन बदलती जीवनशैली के बीच कम उम्र के लोग भी इसके जोखिम से अछूते नहीं हैं। मेदांता अस्पताल के सीएमडी और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश त्रेहन ने अपने लेख में हृदय रोग के जोखिम, बदलती जीवनशैली और समय रहते इसकी पहचान की जरूरत पर जोर दिया है।

प्रमुख बातें
डॉ. नरेश त्रेहन के मुताबिक हृदय रोग के जोखिम को समय रहते पहचानना जरूरी है।
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं।
लंबे समय तक बैठे रहना, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित नींद और प्रोसेस्ड फूड चिंता बढ़ाते हैं।
परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर विशेष सावधानी जरूरी है।
सीने में बेचैनी, सांस फूलना, अचानक पसीना, मितली या दर्द जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉ. नरेश त्रेहन ने बदलती तस्वीर पर जताई चिंता
डॉ. नरेश त्रेहन के अनुसार, पहले यह आम धारणा थी कि हृदय रोग मुख्य रूप से उम्र बढ़ने के बाद होता है। हालांकि, अब कम उम्र में भी कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के जोखिम पर ध्यान देने की जरूरत है। उनके मुताबिक जोखिम कारकों की पहचान जितनी जल्दी होगी, उतनी ही जल्दी बचाव के कदम उठाए जा सकते हैं।

जीवनशैली के बदलाव को नहीं कर सकते नजरअंदाज
डॉ. त्रेहन ने अपने लेख में बताया है कि लंबे समय तक बैठे रहना, पर्याप्त नींद नहीं लेना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन और तंबाकू जैसी आदतें हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। खासकर युवाओं में इन जोखिम कारकों को नजरअंदाज करना भविष्य में परेशानी बढ़ा सकता है।

लक्षण आने का इंतजार न करें
हृदय रोग की एक बड़ी चुनौती यह है कि कई जोखिम कारक लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के मौजूद रह सकते हैं। डॉ. त्रेहन ने सीने में बेचैनी, सांस फूलना, बिना वजह पसीना आना, मितली, चक्कर या हाथ, कंधे और पीठ तक फैलने वाले दर्द जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेने की जरूरत बताई है।

प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी पर जोर
डॉ. नरेश त्रेहन के मुताबिक हृदय रोग से बचाव के लिए प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी यानी बीमारी गंभीर होने से पहले उसके जोखिम की पहचान महत्वपूर्ण है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी जांचों के जरिए जोखिम का आकलन किया जा सकता है।

परिवार में इतिहास है तो रहें ज्यादा सतर्क
अगर परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास रहा है, तो व्यक्ति को अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। डॉ. त्रेहन ने समय रहते जोखिम की पहचान और उचित चिकित्सकीय सलाह लेने के महत्व पर जोर दिया है।

सवाल सिर्फ खतरे का नहीं, समय पर पहचान का है
डॉ. नरेश त्रेहन के लेख का मुख्य संदेश यही है कि हृदय रोग के स्पष्ट लक्षण सामने आने का इंतजार करने के बजाय जोखिम कारकों की पहचान पहले ही कर ली जानी चाहिए। स्वस्थ जीवनशैली, नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सकीय सलाह हृदय स्वास्थ्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकते हैं।

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