DSPMU Ranchi

DSPMU में शिक्षा व्यवस्था बेहाल, NEP के दबाव में छात्र; सेमेस्टर–1 में आधे से अधिक फेल.

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

मुख्य बिंदु-

• कई विषयों में 50% से अधिक छात्र असफल
• शिक्षकों की कमी और अधूरी पढ़ाई सबसे बड़ा कारण
• एक सेमेस्टर में 10 विषयों का बोझ
• छात्रों ने सिलेबस और क्लास न होने का लगाया आरोप

DSPMU परिणामों ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल

रांची- डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU) में नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत संचालित स्नातक B.A, B.Com और B.Sc सेमेस्टर–1 (सत्र 2024–2028) की परीक्षा का परिणाम विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अप्रैल 2025 में आयोजित परीक्षा के नतीजों में कई विषयों में 50 प्रतिशत से अधिक छात्र फेल हो गए हैं। इस परिणाम ने NEP के क्रियान्वयन और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विषयवार पास–फेल का हाल

सेमेस्टर–1 के परिणामों में खोरठा (5 पास, 27 फेल), नागपुरी (64 पास, 106 फेल), अंग्रेजी भाषा एवं साहित्य (130 पास, 185 फेल), एंथ्रोपोलॉजी (38 पास, 142 फेल), हिंदी (76 पास, 96 फेल), संस्कृत (30 पास, 52 फेल), इलेक्ट्रॉनिक्स (47 पास, 67 फेल), पर्यावरण विज्ञान (26 पास, 40 फेल) जैसे विषयों में फेल होने वाले छात्रों की संख्या चिंताजनक है। वहीं बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन में भी 286 छात्र पास हुए, लेकिन 213 छात्र फेल हो गए। कुल मिलाकर अधिकांश विषयों में पास और फेल का अंतर बेहद कम या फेल छात्रों के पक्ष में ज्यादा रहा।

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शिक्षकों ने गिनाईं असफलता की वजहें

विश्वविद्यालय के शिक्षकों का कहना है कि असफलता के पीछे कई संरचनात्मक कारण हैं। विश्वविद्यालय में लंबे समय से शिक्षकों की भारी कमी है। नई शिक्षा नीति के तहत विषयों की संख्या बढ़ा दी गई है, लेकिन उसके अनुपात में न तो फैकल्टी उपलब्ध है और न ही संसाधन। एक शिक्षक पर कई विषयों का अतिरिक्त अकादमिक बोझ डाल दिया गया है। अतिरिक्त विषयों की नियमित कक्षाएं नहीं हो पा रही हैं और पर्याप्त क्लासरूम की भी कमी है। इसका सीधा असर पढ़ाई की गुणवत्ता पर पड़ा है।

छात्रों का आरोप: पढ़ाई अधूरी, क्लास नहीं

छात्रों का आरोप है कि सेमेस्टर–1 के दौरान कई विषयों का सिलेबस पूरा ही नहीं कराया गया। खासकर एक्स्ट्रा सब्जेक्ट्स की क्लास या तो हुई ही नहीं या नाममात्र की रही। कई कॉलेजों में शिक्षक उपलब्ध नहीं रहने के कारण छात्र रोज कॉलेज आकर बिना पढ़े लौटने को मजबूर हुए। छात्रों का कहना है कि परीक्षा का पैटर्न कठिन था, लेकिन तैयारी का अवसर नहीं मिला।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई शिक्षा नीति को लागू करने से पहले जिस बुनियादी ढांचे, शिक्षकों और संसाधनों की आवश्यकता थी, वह DSPMU में उपलब्ध नहीं है। एक ही सेमेस्टर में छात्रों पर लगभग 10 विषयों का बोझ डाल दिया गया, जिससे न तो छात्र ठीक से पढ़ पाए और न ही शिक्षक गुणवत्तापूर्ण अध्यापन करा सके। यही कारण है कि फेल होने वाले छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

उच्च शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

DSPMU की यह स्थिति केवल एक विश्वविद्यालय की समस्या नहीं है, बल्कि यह राज्य की उच्च शिक्षा व्यवस्था की कमजोर तस्वीर पेश करती है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले सत्रों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं, जिसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।

समाधान और सुझाव

विशेषज्ञों और शिक्षकों ने हालात सुधारने के लिए तत्काल शिक्षकों की बहाली, अतिरिक्त विषयों के लिए अलग फैकल्टी, नियमित कक्षाओं की व्यवस्था, सिलेबस और परीक्षा पैटर्न में संतुलन, क्लासरूम व शैक्षणिक संसाधनों के विस्तार और NEP को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की मांग की है। साथ ही छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए एक प्रभावी ग्रिवांस रिड्रेसल सेल गठित करने का सुझाव भी दिया गया है।

राज्यपाल और शिक्षा मंत्री से हस्तक्षेप की मांग

छात्र संगठनों और शिक्षाविदों ने राज्यपाल सह कुलाधिपति और उच्च शिक्षा मंत्री से इस चरमराती शिक्षा व्यवस्था पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है। छात्रों के हित में एक उच्चस्तरीय जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराने की जरूरत बताई जा रही है, ताकि भविष्य में छात्रों को इस तरह की शैक्षणिक परेशानी का सामना न करना पड़े।

कुमार हेमन्त 

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