AJSU का JMM पर हमला: OBC आरक्षण खत्म करने की साजिश रचने का आरोप.

झारखंड/बिहार विधानसभा चुनाव

आजसू का झामुमो पर तीखा प्रहार: ओबीसी आरक्षण खत्म करने की साजिश रचने का आरोप

मुख्य बिंदु:

  • आजसू ने झामुमो को बताया ओबीसी विरोधी, आरक्षण खत्म करने की रची थी साजिश

  • सुदेश महतो के प्रयासों से पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण बचा

  • ट्रिपल टेस्ट में देरी और पिछड़ा वर्ग आयोग अध्यक्ष का पद खाली होने पर उठाए सवाल

  • सुप्रीम कोर्ट और राज्यों के उदाहरण देते हुए 50% से अधिक आरक्षण की मांग



ओबीसी आरक्षण को लेकर आजसू का बड़ा आरोप

रांची। आजसू पार्टी ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) पर ओबीसी वर्ग के खिलाफ साजिश रचने का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि झामुमो पंचायत और नगर निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण समाप्त करने की कोशिश कर रहा था, जिसे आजसू प्रमुख सुदेश महतो के हस्तक्षेप से रोका गया।

पार्टी का आरोप है कि हेमंत सरकार की इस साजिश के कारण पिछले कई वर्षों से चुनाव नहीं हो पा रहे हैं, जबकि आजसू हमेशा ओबीसी को 27% आरक्षण दिलाने के लिए संघर्षरत रही है।

“झूठ का पुलिंदा है झामुमो का आरोप”

आजसू के केंद्रीय महासचिव डॉ. लंबोदर महतो और वरिष्ठ नेता प्रवीण प्रभाकर ने संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि झामुमो द्वारा आजसू पर लगाए गए आरोप झूठ का पुलिंदा हैं।

उन्होंने कहा कि अगर झामुमो के पास तथ्य हैं, तो वह उन्हें प्रस्तुत करे, वरना जनता को गुमराह करना बंद करे।

ओबीसी आरक्षण को लेकर आजसू की कानूनी लड़ाई

डॉ. लंबोदर महतो ने बताया कि जब सुदेश महतो ग्रामीण स्तर पर 10 हजार पदों पर ओबीसी आरक्षण लागू करवा रहे थे, तब वर्तमान सरकार ने उसे पूरी तरह से खत्म कर दिया।

आजसू सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद ही राज्य सरकार ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया अपनाने को मजबूर हुई। उन्होंने हेमंत सरकार पर आरोप लगाया कि वह बिना ट्रिपल टेस्ट के चुनाव करवाना चाहती थी, ताकि ओबीसी को आरक्षण से वंचित किया जा सके।

पूर्व से ही चल रहा है आजसू का संघर्ष

प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि झारखंड बनने के बाद राजग सरकार ने 2001 में ओबीसी को 27% आरक्षण देने की कोशिश की थी, जो कोर्ट द्वारा रद्द कर दी गई थी। 2021 में भी सुदेश महतो ने विधानसभा में गैर-सरकारी संकल्प लाकर ओबीसी आरक्षण पर फिर से आवाज उठाई थी।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की इंदिरा साहनी केस में दी गई राय के अनुसार विशेष परिस्थितियों में 50% से अधिक आरक्षण दिया जा सकता है। इसी आधार पर तमिलनाडु में 69%, छत्तीसगढ़ में 58% और पूर्वोत्तर राज्यों में 80% तक आरक्षण है।

ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया सिर्फ खानापूर्ति

प्रवीण प्रभाकर ने कहा कि वर्तमान में ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बन कर रह गई है। एक साल से पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का पद खाली है, जिससे ट्रिपल टेस्ट की वैधानिकता पर सवाल उठते हैं।

सरकार जानबूझ कर देरी कर रही है ताकि ओबीसी को उनका हक न मिल सके। उन्होंने कहा कि सुदेश महतो ने हमेशा ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के अधिकारों की लड़ाई लड़ी है और आगे भी लड़ते रहेंगे।

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