झारखंड में घटती आदिवासी आबादी पर शिल्पी नेहा तिर्की की चिंता: कांग्रेस प्रवक्ताओं की कार्यशाला में उठाए अहम सवाल
मुख्य बिंदु:
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झारखंड में प्रवासी आबादी बढ़ी, आदिवासी जनसंख्या स्थिर या घटी
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परिसीमन में जनसंख्या को आधार बनाने से आरक्षित सीटें घट सकती हैं
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इससे आदिवासी सुरक्षा और संरक्षण को खतरा: शिल्पी नेहा तिर्की
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राहुल गांधी ने कांग्रेस प्रवक्ताओं की कार्यशाला को किया संबोधित
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बीजेपी-आरएसएस पर जातीय जनगणना को भटकाने का आरोप
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आदिवासी पहचान को उप-वर्गों में बांटना गलत: मंत्री तिर्की
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देशभर में आदिवासी समाज एकता का प्रतीक है
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सरना धर्म को जनगणना में अलग कॉलम देने की मांग
प्रवासियों की बढ़ती संख्या से आदिवासी जनसंख्या पर संकट
झारखंड में समय के साथ बाहरी राज्यों से आकर बसने वाले लोगों की आबादी में लगातार इजाफा हुआ है। इसके उलट, आदिवासी समाज की जनसंख्या या तो स्थिर बनी हुई है या फिर उसमें गिरावट देखी गई है। कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने इस असंतुलन को बेहद चिंताजनक बताया है।
परिसीमन के आधार पर घट सकती हैं आदिवासी आरक्षित सीटें
मंत्री तिर्की ने आशंका जताई कि यदि जनसंख्या को ही परिसीमन का आधार बनाया गया, तो झारखंड जैसे पांचवीं अनुसूची वाले राज्यों में आदिवासियों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या में कमी आ सकती है। यह फैसला सीधे तौर पर आदिवासी समाज की सुरक्षा, संरक्षण और प्रतिनिधित्व को कमजोर करेगा।

दिल्ली में कांग्रेस प्रवक्ताओं की कार्यशाला में रखे विचार
दिल्ली में आयोजित कांग्रेस प्रवक्ताओं की राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने उपरोक्त बातें कहीं। इस कार्यशाला में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी विशेष रूप से हिस्सा लिया और सामाजिक न्याय को लेकर कांग्रेस की प्रतिबद्धता को दोहराया।
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जातीय जनगणना को लेकर कांग्रेस का रुख साफ
कार्यशाला में ‘जातीय जनगणना का भारत के आदिवासी समाज पर प्रभाव, चुनौती और समाधान’ विषय पर बोलते हुए मंत्री तिर्की ने कहा कि कांग्रेस पार्टी को इस मुद्दे पर नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी। उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस सामाजिक न्याय की भावना के साथ जातीय जनगणना को आगे ले जाना चाहती है, जबकि बीजेपी और आरएसएस इसे भ्रमित और बाधित करने में लगे हैं।
बीजेपी आदिवासी समाज पर थोप रही जातीय व्यवस्था: तिर्की
मंत्री शिल्पी ने यह भी स्पष्ट किया कि आदिवासी समाज में प्राचीन काल से ही जातीय व्यवस्था का कोई स्थान नहीं रहा है। ऐसे में बीजेपी द्वारा इसे आदिवासियों पर थोपने का प्रयास पूरी तरह से अनुचित और खतरनाक है।
आदिवासी समुदाय की एकीकृत पहचान जरूरी
शिल्पी तिर्की ने कहा कि जनगणना प्रक्रिया में आदिवासी समुदाय को उप-वर्गों में नहीं बांटना चाहिए। उनकी मूल और एकीकृत पहचान के साथ उन्हें दर्ज किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि देशभर का आदिवासी समाज, चाहे वह झारखंड हो, मणिपुर, ओडिशा या छत्तीसगढ़—सभी सांस्कृतिक, मानसिक और आत्मिक रूप से एकजुट हैं।
एक आदिवासी पर हमला, पूरे समाज की पीड़ा
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि देश के किसी भी हिस्से में जब किसी आदिवासी पर हमला होता है, तो वह सिर्फ एक राज्य की नहीं बल्कि पूरे भारत के आदिवासी समाज की पीड़ा बन जाती है। यह एकता ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
सरना धर्म को जनगणना में मान्यता देने की मांग
अंत में मंत्री शिल्पी ने यह मांग भी रखी कि सरना धर्मावलंबियों को जनगणना में अलग कॉलम दिया जाए ताकि उनकी धार्मिक पहचान स्पष्ट रूप से दर्ज की जा सके। यह कदम आदिवासी संस्कृति और आस्था के सम्मान और संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
