मुख्य बिंदु-
• राज्य के वित्त रहित इंटर कॉलेज और स्कूलों का अनुदान फॉर्म 2025-26 में नहीं भरे जाएंगे
• 10 साल से लंबित 75% अनुदान वृद्धि प्रस्ताव पर कैबिनेट में चर्चा नहीं
• उपचार के अभाव में 500 से अधिक शिक्षकों की मौत, एक कर्मचारी की बैठक में आते समय मौत
• सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का पोर्टल बंद, 1 लाख बच्चियां लाभ से वंचित
• 21 विद्यालयों का 2024-25 का अनुदान अब तक रोका गया
• 7 दिसंबर को फिर से समीक्षा बैठक, आर-पार की लड़ाई की चेतावनी
75% अनुदान वृद्धि प्रस्ताव पर कैबिनेट की सहमति तक ऑनलाइन फॉर्म नहीं
रांची- राज्य के वित्त रहित इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय एवं मदरसा विद्यालयों ने स्पष्ट घोषणा की है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का अनुदान ऑनलाइन आवेदन किसी भी हालत में नहीं भरा जाएगा। यह निर्णय रांची में आयोजित प्राचार्यों और शिक्षक प्रतिनिधियों की राज्य स्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

10 साल से लंबित 75% अनुदान वृद्धि, लेकिन कैबिनेट में प्रस्ताव नहीं
बैठक में प्राचार्यों ने कहा कि डिग्री कॉलेजों को तो 2023-24 में ही 75% अनुदान वृद्धि दे दिया गया, लेकिन स्कूलों के मामले में 10 वर्ष से फाइल अटकी हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विधि विभाग, वित्त विभाग और कैबिनेट सचिवालय से सहमति मिलने के बाद भी मंत्री परिषद की बैठक में प्रस्ताव को शामिल नहीं किया जा रहा है।
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मुख्यमंत्री द्वारा “विमर्श” के नाम पर फाइल लंबित
शिक्षकों ने कहा कि मुख्यमंत्री ने फाइल वापस स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को भेज कर ‘विमर्श’ की बात कही थी, लेकिन तीन महीने बाद भी कोई निर्णय नहीं हुआ है। प्राचार्यों का सवाल था—“सरकार को आखिर शिक्षकों की कितनी लाशें चाहिए?”

बैठक में पहुंचे कॉलेज कर्मचारी की मौत, 500 से अधिक मौतों का दावा
बैठक में एक दर्दनाक घटना भी हुई। गोस्नर कॉलेज के कर्मचारी अजय मुनान एक्का की तबीयत खराब थी। पैसे की कमी के कारण उनका इलाज ठीक से नहीं हो पा रहा था। बैठक में आते समय 75% वृद्धि प्रस्ताव टलने की खबर सुनकर उनकी तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई।
शिक्षकों ने बताया कि पिछले वर्षों में इलाज के अभाव में 500 से अधिक शिक्षक-कर्मचारियों की मौत हो चुकी है।
राज्य कर्मी वेतनमान की मांग पर भी कार्रवाई नहीं
शिक्षक मोर्चा ने विधानसभा में मुख्यमंत्री के आश्वासन और सचिवालय के पत्र का हवाला देते हुए कहा कि कार्मिक विभाग ने 17 मार्च 2025 को ही स्कूली शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर वित्त-रहित शिक्षा नीति समाप्त कर राज्य कर्मियों के समान वेतन देने की कार्रवाई शुरू करने को कहा था, परंतु विभाग ने अब तक कोई कदम नहीं उठाया।
21 विद्यालयों का 2024-25 का अनुदान रोका—जैक अवधि बढ़ाने के बाद भी भुगतान नहीं
बैठक में बताया गया कि 21 स्कूलों का 2024-25 का अनुदान अब तक जारी नहीं हुआ है। जब जैक ने अवधि विस्तार दे दिया है, तो फिर कोषागार और जिला शिक्षा कार्यालय राशि क्यों रोक रहे हैं?
मोर्चा ने इस पर शिक्षा सचिव को ज्ञापन भी दिया है।
अनुदान सीधे खाते में भेजने का पुराना आदेश भी लागू नहीं
27 मार्च 2020 को ही सरकार ने स्कूल-कॉलेजों के खातों में सीधे अनुदान भेजने का आदेश जारी किया था। तत्कालीन शिक्षा मंत्री ने भी फाइल में स्पष्ट आदेश दिया था। इसके बावजूद राशि कोषागार और जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय भेजी जा रही है, जहाँ “बंदरबांट” का आरोप लगाया गया।
सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना का पोर्टल बंद, 1 लाख छात्राएं प्रभावित
मोर्चा ने कहा कि अनुदानित इंटर कॉलेजों को हर साल मिलने वाली सावित्रीबाई फुले बालिका समृद्धि योजना की राशि इस बार नहीं मिल पा रही है क्योंकि पोर्टल ही नहीं खुल रहा है।
इन विद्यालयों में 1 लाख से अधिक बच्चियां पढ़ती हैं—जिनमें
• आदिवासी
• अनुसूचित जाति
• पिछड़ा वर्ग
• गरीब वर्ग
की छात्राएं शामिल हैं।
यदि यह राशि नहीं मिली तो हजारों बच्चियों की पढ़ाई बंद होने का खतरा है।
“75% वृद्धि नहीं, तो ऑनलाइन आवेदन भी नहीं”—शिक्षकों का ऐलान
मोर्चा के नेताओं और प्राचार्यों ने कहा कि जब तक 75% अनुदान वृद्धि की मंजूरी नहीं मिलती, किसी भी परिस्थिति में 2025-26 का अनुदान फॉर्म ऑनलाइन नहीं भरा जाएगा।
नेतृत्व ने कहा—“अब आर-पार की लड़ाई होगी।”
7 दिसंबर को दोबारा बड़ी समीक्षा बैठक
निर्णय हुआ कि अगली समीक्षा बैठक 07 दिसंबर 2025 को सर्वोदय बाल निकेतन, धुर्वा, रांची में होगी। सभी प्राचार्य, प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रतिनिधियों को बुलाया गया है।
बैठक की अध्यक्षता संजय कुमार ने की, जबकि निर्णयों की जानकारी मोर्चा के प्रवक्ता मनीष कुमार, अरविंद सिंह और मुरारी प्रसाद सिंह ने दी।
