झारखंड राजनीति में टकराव तेज, भाजपा टीएसी की बैठक से रहेगी दूर।

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हेमंत सरकार की टीएसी बैठक का भाजपा करेगी बहिष्कार: बाबूलाल मरांडी का बड़ा हमला

मुख्य बिंदु:

  • भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने टीएसी बैठक से दूरी बनाने की घोषणा की

  • हेमंत सरकार को बताया आदिवासी विरोधी

  • आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए और खनन माफिया आदिवासियों के अधिकारों का हनन कर रहे

  • आदिवासी महिला के मामले पर सरकार की संवेदनहीनता पर उठाए सवाल

  • भाजपा ने आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने की बात कही



टीएसी बैठक का बहिष्कार करेगी भाजपा

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने हेमंत सरकार द्वारा बुलाई गई ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल (टीएसी) की बैठक में शामिल न होने का ऐलान किया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने साफ कहा है कि हेमंत सरकार आदिवासी विरोधी सरकार है, और ऐसे में इस बैठक का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

मरांडी का आरोप: लगातार पीड़ित हो रहा आदिवासी समाज

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पिछले साढ़े पांच वर्षों में झारखंड के आदिवासी समाज पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बांग्लादेशी घुसपैठिए आदिवासियों के हक और अधिकारों का अतिक्रमण कर रहे हैं। वहीं, खनन माफिया जल-जंगल-जमीन का खुलेआम शोषण कर रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कभी इस पर संज्ञान नहीं लिया।

गंभीर आरोप: दुष्कर्म आरोपी को मुआवजा

भाजपा नेता ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक आदिवासी महिला से दुष्कर्म की कोशिश के मामले में आरोपी को सरकार द्वारा मुआवजा दिया गया, जो न सिर्फ शर्मनाक है बल्कि यह सरकार की आदिवासी विरोधी सोच को दर्शाता है।

भाजपा का रुख: आदिवासी अस्मिता के लिए संघर्ष

मरांडी ने कहा कि जब सरकार ही आदिवासी उत्पीड़न को प्रोत्साहन और पुरस्कार दे रही हो, तो ऐसे में टीएसी की बैठक में भाग लेना बेमानी है। उन्होंने दोहराया कि भाजपा आदिवासी समाज की अस्मिता और उनके अस्तित्व की रक्षा के लिए पूरी तरह संकल्पित है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा का संघर्ष सड़क से लेकर सदन तक जारी रहेगा।

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