“ये हत्या है!” रामगढ़ हादसे पर फूटा बाबूलाल मरांडी का गुस्सा.

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रामगढ़ हादसा कोई दुर्घटना नहीं, सरकार की लापरवाही से हुई ‘हत्या’ : बाबूलाल मरांडी

मुख्य बिंदु:

  • रामगढ़ के करमा प्रोजेक्ट में कोयला खदान हादसे से नेता प्रतिपक्ष आक्रोशित

  • बाबूलाल मरांडी ने घटना को बताया सरकार की लापरवाही से हुई ‘हत्या’

  • पुलिस और प्रशासन पर अवैध खनन को संरक्षण देने का गंभीर आरोप

  • डीजीपी की वैधता पर भी उठाए सवाल, जांच की मांग



रामगढ़, 5 जुलाई 2025:

झारखंड के रामगढ़ ज़िले में करमा प्रोजेक्ट की अवैध कोयला खदान में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर राज्य के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया के ज़रिए उन्होंने इस घटना को केवल “हादसा” न मानकर “सरकार की संरक्षित हत्या” बताया है।

“यह हादसा नहीं, सरकार की लापरवाही से हुई हत्या है”

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि करमा प्रोजेक्ट में अवैध कोयला खनन के दौरान कई श्रमिक खदान में दब गए, जिससे मन बेहद व्यथित और आक्रोशित है। उन्होंने लिखा, “मैं ईश्वर से सभी की सलामती की प्रार्थना करता हूँ और शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता हूँ। लेकिन यह कोई सामान्य हादसा नहीं, बल्कि सरकार की लापरवाही से हुई हत्या है।”

सरकार की चुप्पी और माफियाओं को खुली छूट पर सवाल

मरांडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह जानबूझकर अवैध खनन को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने लिखा, “रामगढ़ हो या धनबाद, हज़ारीबाग़ हो या बोकारो, पूरे झारखंड में कोयले की कालिख में मौत का धंधा फल-फूल रहा है और सरकार दावा करती है कि उसे कुछ पता नहीं है। यह साफ है कि ये कारोबार पुलिस और सरकार के संरक्षण में चल रहा है।”

अवैध डीजीपी और प्रशासनिक विफलता का मुद्दा उठाया

बाबूलाल मरांडी ने राज्य के पुलिस प्रमुख पर भी निशाना साधा और लिखा, “जब राज्य को ही एक अवैध डीजीपी चला रहा हो, तो फिर किसी जवाबदेही की उम्मीद ही कैसे की जा सकती है?” उन्होंने यह भी कहा कि सीसीएल द्वारा बंद की गई खदान को माफियाओं ने सरकार की नाक के नीचे फिर से शुरू कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि “क्या यह सरकार की नाकामी नहीं है?”

उच्चस्तरीय जांच और जवाबदेही की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि “अब मौत का यह सिलसिला बंद होना चाहिए। सरकार को हर एक जान का हिसाब देना होगा। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो यह दुर्घटना रोकी जा सकती थी।”

राजनीतिक माहौल गरम, सरकार की मुश्किलें बढ़ीं

इस बयान के बाद राज्य की राजनीति और गरमा गई है। विपक्ष लगातार सरकार की विफलताओं को उजागर कर रहा है, वहीं जनता के बीच भी अवैध खनन को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

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