बाबूलाल मरांडी बयान डाहू यादव फरार

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद तीन साल से फरार डाहू यादव – मरांडी.

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झारखंड में अवैध खनन पर सियासी घमासान : बाबूलाल मरांडी का हेमंत सरकार और पुलिस पर बड़ा हमला

मुख्य बिंदु

  • बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर झारखंड पुलिस और हेमंत सरकार को घेरा

  • आरोप: संताल आदिवासी युवक को हिरासत में प्रताड़ित कर मार दिया गया

  • सवाल: डाहू यादव जैसे कुख्यात अपराधी को पकड़ने से क्यों कतरा रही है पुलिस?

  • ईडी की कार्रवाई के बाद भी तीन साल से फरार है डाहू यादव, सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भी अनदेखी



मरांडी का बड़ा आरोप: पुलिस की दोहरी कार्रवाई

रांची, 28 अगस्त 2025- झारखंड भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार और राज्य पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि “क्या यह हेमंत सरकार की तानाशाही है या झारखंड पुलिस की मनमानी?” मरांडी का आरोप है कि एक संताल आदिवासी, जो सैकड़ों गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए संघर्ष कर रहा था, उसे गलत तरीके से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया गया और उसकी मौत हो गई। वहीं दूसरी ओर, कुख्यात अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से बचती रही है।

डाहू यादव पर निशाना

मरांडी ने विशेष तौर पर राजेश उर्फ डाहू यादव का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि डाहू झारखंड में बालू और पत्थर के अवैध खनन का बड़ा खिलाड़ी है। जुलाई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उसके ठिकानों पर छापेमारी की थी। करोड़ों की संपत्तियां और बैंक अकाउंट ज़ब्त हुए, यहां तक कि उसका जहाज़ भी जब्त कर लिया गया। कुर्की तक की कार्रवाई हुई। लेकिन इसके बाद डाहू यादव केवल एक बार ईडी दफ्तर पहुंचा और तब से अब तक फरार है।

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सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी

मरांडी ने सवाल उठाया कि अगस्त 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि डाहू यादव 15 दिनों के भीतर सरेंडर करे, लेकिन अब तक आदेश की अवहेलना की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार और पुलिस की नाक के नीचे अवैध खनन और गोरखधंधे का सिलसिला जारी है।

अवैध कारोबार और मजदूरों की मौत

मरांडी ने आरोप लगाया कि साहिबगंज इलाके में डाहू यादव के संरक्षण में गोरखधंधा खुलेआम चल रहा है। गंगा में नाव पलटने से पांच मजदूरों की मौत हुई, लेकिन सरकार और पुलिस ने किसी भी स्तर पर कड़ी कार्रवाई नहीं की।

सत्ता संरक्षण का आरोप

मरांडी का कहना है कि जब “ऊपर से आदेश” आता है तो पुलिस किसी भी निर्दोष को हिरासत में ले लेती है, फर्जी एनकाउंटर तक कर देती है। लेकिन डाहू यादव जैसे बड़े अपराधियों को पकड़ने से बचती है क्योंकि उन्हें सत्ता का संरक्षण हासिल है। उन्होंने आरोप लगाया कि डाहू की काली कमाई की हिस्सेदारी “नीचे से ऊपर तक” पहुंच रही है।

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